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मानतलाई में फंसी 11 हजार भेड़-बकरियों को किया रेस्क्यू

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मणिकर्ण घाटी के मानतलाई के समीप फसें भेडपालको को रेस्क्यू करने के लिए बनाए रास्ता से रेस्क्यू कर? - फोटो : Kullu
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कुल्लू। जिला कुल्लू की पार्वती घाटी के मानतलाई में पुल टूटने व ग्लेशियर के गिरने से फंसी 15 हजार से अधिक भेड़-बकरियों में से 11 हजार भेड़-बकरियों को रेस्क्यू किया गया है। मानतलाई को जाने वाले रास्ते के बीच में आने वाले टुंडाभुज नामक स्थान पर पार्वती नदी पर बना पुल सात साल पहले टूट गया था। वैकल्पिक रास्ता भी इस साल गर्मियों में ग्लेशियर गिरने से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसके बाद जिला प्रशासन ने 15 हजार भेड़-बकरियों और 50 से अधिक भेड़पालकों को निकालने के लिए न केवल टुंडाभुज के पास अस्थायी रास्ता बनाया बल्कि यहां से एक टीम ने भेड़ बकरियों को रेस्क्यू भी किया है। जिला प्रशासन ने नौ सितंबर को द लिटिल रेवल एडवेंचर कटागला के डायरेक्टर शिव राम, सदस्य सूरज महंत, महेंद्र सिंह, सुनील नेगी और केशव राम की टीम मानतलाई के लिए रवाना की थी। टीम को रेस्क्यू करने में एक सप्ताह का समय लगा। हालांकि पार्वती नदी के किनारे अस्थायी रास्ता बनाना कोई आसान काम नहीं था। युवाओं के जोश ने इस मुश्किल काम को आसान कर दिया। सबसे पहले नोआछ रूआड़ी जहां से घोड़ों को नदी के पार करवाया गया। पार्वती नदी के तेज बहाव में घोड़े बह न जाएं, इसके लिए घोड़ों को नदी पार करवाने के लिए रस्से का सहारा लिया गया। जबकि टुंडाभुज के पास पथरीली घाटी से भेड़-बकरियों को सुरक्षित निकाला गया। अब मानतलाई में सिर्फ तीन भेड़पालक पीछे रह गए हैं। बाकी भेड़पालकों को उनकी भेड़-बकरियों के साथ रेस्क्यू किया गया है। द लिटिल रेवल एडवेंचर कटागला के डायरेक्टर शिव राम ने कहा कि इस अभियान को पूरा करने के लिए उन्हें सप्ताह का समय लगा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के सहयोग से यह संभव हो पाया है। अगर प्रशासन इनकी मदद नहीं करता तो भेड़पालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता। उधर, उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग ने कहा कि मानतलाई में टूटे हुए पुल को अगले साल तक तैयार किया जाएगा। इसका एस्टीमेंट तैयार कर दिया है। फिलहाल रेस्क्यू टीम की सहायता भेड़-बकरियों व भेड़पालकों को निकाला गया है।
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