कुल्लू। बाढ़ और भूस्खलन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के रास्ते टूट गए हैं। सड़कों के डंगे ढह गए हैं लेकिन अब रेत-बजरी न मिलने से निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। सरकार के क्रशर बंद करने के निर्णय से यह समस्या उत्पन्न हुई है।
अब निर्माण सामग्री न मिलने से पंचायतों के प्रतिनिधि पसोपेश में हैं कि विकास कार्य कैसे शुरू करवाए जाएं। चल रहे निर्माण कार्य भी ठप हो गए हैं। रेत बजरी के बिना पंचायतों में कोई भी काम नहीं हो पा रहा है। रास्तों की मरम्मत और डंगे लगाने के लिए आरसीसी का काम होगा। इसके लिए रेत बजरी की जरूरत पड़ेगी।
पंचायतों के प्रतिनिधियों को रेत और बजरी नहीं मिल रही है। पंचायतों में निर्माण सामग्री न मिलने से राहत कार्य, 15वें वित्तायोग, मनरेगा के कार्य बाधित हुए हैं। जिला विकास अभिकरण के पास कुल्लू जिले में आनी, निरमंड, बंजार, नग्गर और कुल्लू में मनरेगा के तहत 4,000 कार्यों के आवेदन आए हैं।
इनमें किसी के घर के डंगे लगने, कहीं रास्तों और अन्य मरम्मत का काम होना है। इन कामों पर फिलहाल ब्रेक लग गई है। दूसरी और जिले में 500 से अधिक घर आपदा में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं जबकि 2,000 से अधिक घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। आपदा से प्रभावित हुए लोग भी निर्माण सामग्री न मिलने से परेशान हैं। रतोचा पंचायत के उपप्रधान डीएस ठाकुर ने कहा कि आपदा के बाद निजी और सरकारी कामों के लिए रेत-बजरी की सख्त जरूरत है। इस समय निर्माण सामग्री न मिलने से काम प्रभावित हो रहे हैं।
निर्माण सामग्री न मिलने से पंचायतों में मनरेेगा, राहत कार्य सहित अन्य कार्य प्रभावित हुए हैं। पंचायत प्रतिनिधि कार्यों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
-केएस राणा, खंड विकास अधिकारी, कुल्लू
120 स्कूल भवन भी हुए हैं क्षतिग्रस्त
जिला कुल्लू में 120 स्कूल भवन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें मरम्मत आदि कार्य किया जाना है लेकिन निर्माण सामग्री न मिलने के कारण इन स्कूल भवनों का कार्य भी लटक गया है। शिक्षा विभाग की ओर से क्षतिग्रस्त स्कूलों के विकल्प के तौर पर निजी भवनों में कक्षाएं लगाने की व्यवस्था की गई है।