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दशहरा के तीसरे दिन 17 अक्तूबर को ढालपुर में होगा कुष्ठू काहिका

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कुल्लू। जुलाई माह में नग्गर में हुई जगती में देवी-देवताओं द्वारा दिए गए आदेश का पालन 17 अक्तूबर को दशहरा के तीसरे दिन किया जाएगा। शनिवार को भगवान रघुनाथ के दरबार में जिलाभर से करीब दो दर्जन देवी-देवताओं के कारदारों ने भाग लिया और 17 अक्तूबर की तिथि तय की गई। जिसमें ढालपुर में कुष्ठू काहिका का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान महिला नड़ द्वारा कुष्ठू काहिका की परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। जिसमें पिछले दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं को न बुलाने, दशहरा में बजाई गई देवधुन तथा देवस्थलों से थड़ियों को हटाने आदि से रुष्ट देवी-देवताओं ने इसके निवारण के लिए कुष्ठू काहिका करवाने को कहा था। इस साल कुल्लू का अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव 15 अक्तूबर से शुरू होने जा रहा है। ऐसे में कुष्ठू काहिका को 17 अक्तूबर को मनाया जाएगा। जिसका आयोजन देव विधि के अनुसार होगा। इसमें देवी-देवता उसी रास्ते में परिक्रमा करेंगे जहां दशहरा में भगवान नरसिंह की जलेब यात्रा निकलती है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल दशहरा पर्व में जिलाभर से मात्र सात देवी-देवताओं को बुलाया गया था। हर बार दशहरा में करीब 300 देवी-देवताओं को बुलाया जाता है। ऐसे में दशहरा में आई देवी हिडिंबा के साथ देवता धूमल नाग सहित कई देवी देवताओं ने इसका विरोध जताया है। साथ ही 2019 को ढालपुर में बजाई देवधुन तथा इसे पहले ढालपुर में देवी-देवताओं के बैठने वाली जगहों से उनकी थड़ियों को हटाने पर देवी-देवता नाराज हो गए थे। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि ढालपुर में 17 अक्तूबर को कुष्ठू काहिका का आयोजन होगा। पूजा अर्चना के साथ महिला नड़ काहिका की सभी परंपराओं को निभाएगी।
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