कुल्लू। पिछले साल बरसात में आई आपदा के कारण भारी नुकसान से पार पाने के लिए जिले को आपदा मिटिगेशन निधि के तहत 24 करोड़ की राशि जारी हुई है। इसमें गड़सा घाटी के मथोगी गांव का नाम नहीं होने से लोगों में सरकार के प्रति रोष है। आपदा के समय गांव के पास ब्यास नदी से भारी नुकसान हुआ था और अब गांव के लिए खतरा बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि फोरलेन निर्माण के दौरान कंपनी ने यहां पर अवैध रूप से डंपिंग की और इससे ब्यास में आई बाढ़ का रुख उनके गांव की तरफ मुड़ गया। ऐसे में मथोगी गांव के लोगों को अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव को ब्यास नदी का खतरा बना है। ऐसे में जिला प्रशासन व सरकार को प्राथमिकता के आधार पर यहां ब्यास किनारे तटीकरण किया जाना चाहिए। ग्रामीण चंद्रमणि शर्मा, विजय कुमार, कुलदीप ठाकुर, प्रदीप ठाकुर, सतीश शर्मा, संतोष शर्मा, शौकत अली, परमेश लाल, नरेंद्र ठाकुर, डोला सिंह, गोपाल शर्मा, लियाकत अली व बरकत अली ने कहा कि आपदा के बाद जिन गांवों और कस्बों को नदी-नालों का खतरा है, उस जगह पर तटीकरण किया जाना है। प्रदेश सरकार की ओर से स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड के तहत जिले को 24 करोड़ 8 हजार 60 रुपये की राशि जारी की है। इसमें मथोगी गांव को शामिल नहीं किया गया है। कहा कि ब्यास में आई बाढ़ से गांव में 70 परिवार प्रभावित हुए हैं। ऐसे में गांव की सुरक्षा के लिए यहां पर तटीकरण होना जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मथोगी गांव के पास ब्यास नदी में प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षा दीवार लगाई लाए। एडीएम अश्वनी कुमार ने कहा कि जिले में आपदा से हुए नुकसान वाली जगहों का तटीकरण किया जाएगा। यह काम अलग-अलग चरणा में होगा। इसकी पहली किस्त करीब 24 करोड़ की जारी हुई है।