मणिकर्ण में किया देव परंपरा का निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। विश्व के सबसे प्राचीन लाेकतंत्र मलाणा के अधिष्ठाता देवता जमलू ने मणिकर्ण में लाव-लश्कर के साथ शाही स्नान किया। शाही स्नान के बाद देवता अपने देवालय की ओर प्रस्थान कर गए हैं। मणिकर्ण में देवता जमलू ने कारकूनों के साथ बीते शुक्रवार को इस देव परंपरा का निर्वहन किया। गौर रहे कि देवता जमलू वीरवार को मलाणा से देवलुओं के साथ मणिकर्ण के लिए निकले थे। देवता रशोल की पहाड़ी से होते हुए पहले तो रशोल गांव में पहुंचे। यहां पर देवता का रात्रि ठहराव हुआ। यहां से देवता जमलू की यात्रा शुरू हुई। इसके बाद देवता छलाल गांव और फिर यहां से मणिकर्ण पहुंचे। मलाणा के देवता जमलू का रथ नहीं है, उनके निशान हैं जिन्हें देवता के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। मलाणा के देवता जमलू की कुल्लू में काफी अधिक मान्यता है। देवता जमलू के कुल्लू में 12 देउघरे हैं। ग्राम पंचायत मलाणा के प्रधान राजू राम ने कहा कि देवता जमलू ने मणिकर्ण में शाही स्नान की परंपरा ढोल-नगाड़ों के साथ निभाई। देवालय पहुंचने ग्रामीणों की ओर से देवता का भव्य स्वागत किया जाएगा।