कुल्लू। रूपी घाटी के जेष्ठा के देवता लक्ष्मी नारायण दशहरा में शामिल होने वाले प्रमुख देवी-देवताओं में से एक हैं। देवता भगवान नरसिंह की जलेब की शोभा बढ़ाते हैं।
दशहरा उत्सव में नरसिंह भगवान की दूसरी जलेब में देवता लक्ष्मी नारायण की अहम भूमिका रहती है। शियाह के देवता जमदग्नि ऋषि के साथ लक्ष्मी नारायण जलेब का आगाज करते हैं। जलेब में देवता लक्ष्मी नारायण का बाजा-नवाज मुख्य रूप से शामिल होता है।
देवलुओं की ओर से राजा की चानणी के पास नाटी भी डाली जाती है। देवता का कुल्लू दशहरा में आने का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। देवता दशहरा शुरू होने से लेकर अब तक शामिल हो रहे हैं।
देवता पहले दिन ही उत्सव में शामिल होकर राजा की चानणी के पास अपने अस्थायी शिविर में विराजमान हो जाते हैं। देवता सात दिन यहां पर रहकर श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
देवता के दरबार में इन दिनों श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं। इस संबंध में देवता लक्ष्मी नारायण जेष्टा के कारदार सर्वदयाल ठाकुर ने कहा कि देवता की नरसिंह भगवान की जलेब में अहम भूमिका होती है। लक्ष्मी नारायण दशहरा में सदियों से आकर देव परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। संवाद