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Kullu News: लाहौल स्पीति में सीएचसी समेत चार अस्पताल, रेडियोलॉजिस्ट एक भी नहीं

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उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के चार स्वास्थ्य संस्थानों में रेडियोलॉजिस्ट के पद स्वीकृत तो हैं मगर अभी तक भरे नहीं जा सके हैं। इसका खामियाजा जहां जिले के लोगों को भुगतना पड़ रहा है, वहीं करोड़ों रुपये खर्च कर स्थापित की गईं अल्ट्रासाउंड मशीनें भी धूल फांक रही हैं। अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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लाहौल-स्पीति जिला के क्षेत्रीय अस्पताल केलांग के साथ, नागरिक अस्पताल उदयपुर और काजा सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शांशा में भी रेडियोलॉजिस्ट के पद स्वीकृत हैं, लेकिन खाली चल रहे हैं। चारों अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीनें धूल फांक रही हैं। हालांकि कुछ माह पूर्व जिला अस्पताल केलांग में रेडियोलॉजिस्ट तैनात किया गया था, लेकिन तीन माह में ही उनका तबादला कर दिया।
घाटी के अंतिम गांव तिंदी को केंद्र में रखा जाए तो यहां अगर कोई बीमार पड़ता है तो उसे अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए 372 किलोमीटर सफर कर कुल्लू आना पड़ता है। जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। आम लोगों के लिए उपचार करवाना काफी मुश्किल भरा हो गया है।
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उपचार के लिए जाना पड़ रहा जिले से बाहर
लाहौल-स्पीति जिले में चिकित्सकों की तैनाती करना किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं रहा है। इसमें कई चिकित्सक या तो ज्वाइन ही नहीं करते या फिर ज्वाइन के कुछ समय बाद अपना तबादला जिले से बाहर करवा लेते हैं। यहां एकमात्र हड्डी विशेषज्ञ चिकित्सक के अलावा अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण लाहौल-स्पीति के मरीजों को जिला से बाहर ही उपचार को दौड़ना पड़ रहा है।
सर्दियों के मौमस में बढ़ जाती हैं मुश्किलें
राहत की बात है कि पिछले पांच साल में लाहौल-स्पीति जिला के सभी स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर के पदों को भरा गया है। मगर जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों के सेवारत न होने से मरीजों की समस्याएं कम नहीं हो रही हैं। सर्दियों के मौसम में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मुश्किलें और भी बढ़ जाती है। इन दिनों जिले के लोग अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड के लिए रेडियोलॉजिस्ट के न होने से परेशान हैं।
जिले में रिक्त चल रहे सभी पदों के बारे में समय-समय पर उच्चाधिकारियों लिखा जाता है। मामला उच्चाधिकारियों के ध्यान में है और तैनाती की प्रक्रिया उच्चस्तर पर ही चलती है।
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-डॉ. रणजीत सिंह वैद्य, सीएमओ, लाहौल-स्पीति
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