कुल्लू/पतलीकूहल।
सेब की लाली पर चरस नामक काले सोने की कालिख भारी पड़ने लगी है। करोड़ों
रुपये के सेब का कारोबार करने वाली कुल्लू घाटी में काले सोने की सालाना
अरबों रुपये के काले सोने की तस्करी हो रही है।
पिछले दो दशकों से
अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया ने यहां पांव पसार लिए हैं। हर साल अमूूमन एक
क्विंटल चरस के मामले सामने आए हैं। यह सिर्फ पुलिस की फाइलों में दर्ज
हैं, जबकि कई गुणा चरस को तो पुलिस को पता भी नहीं चल पाता और खेप राज्य से
बाहर पहुंच जाती है। ऐसे ही एक मामले में पिछले दिनों दिल्ली में पुलिस ने
जिले के दो लोगों को 20 किलो चरस के साथ गिरफ्तार किया था। वहीं कुछ साल
पहले मुंबई क्राइम ब्रांच ने कुल्लू के ही एक रहसजादे को मुंबई गोवा बॉर्डर
पर कुल्लू की किवी फल की पेटियों में छुपाकर भेजी जा रही पौने चार क्विंटल
चरस बरामद की थी। सेब की भांति कुल्लू के ऊंचे दुर्गम जंगलों में हाइब्रिड
चरस का कारोबार होता है। पुलिस और नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने हालांकि
समय-समय पर चरस की खेती को नष्ट करने के अभियान चलाए। बावजूद इसके, ठोस
सफलता नहीं मिल पाई।
नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में तैनात भारतीय पुलिस
सेवा का हाजी मस्ताना नामक अधिकारी तो स्वयं भी चरस तस्करी में संलिप्त पाए
जाने पर गिरफ्तार तक हो चुका है। वहीं पिछले करीब तीन माह में कुल्लू में
आधा क्विंटल से ज्यादा चरस पकड़ी जा चुकी है। हर रोज पकड़ी जा रही चरस
गवाही दे रही है कि काले सोने का कारोबार बदस्तूर जारी है। वहीं एएसपी
निश्चिंत नेगी का कहना है कि पुलिस चरस माफिया को खत्म कर ही दम लेगी।