कुल्लू के 40 पर्यटन स्थलों का होगा कायाकल्प
अनछुए पर्यटन स्थलों को मिलेगी नई राहें-नई मंजिलें
फरवरी में जिला प्रशासन ने सरकार को भेजा था प्रोजेक्ट
पर्यटन स्थलों के फील्ड विजिट को पहुंची एडीबी की टीम
रोशन ठाकुर
कुल्लू। जिला कुल्लू के अनछुए 40 से अधिक पर्यटन स्थलों का नई राहें-नई मंजिलें योजना से कायाकल्प किया जाएगा। एशियन विकास बैंक की और से दी मंजूरी में देवभूमि कुल्लू के पर्यटन स्थल भी शामिल हैं जो दशकों से विकसित होने की राह देख रहे हैं। फरवरी महीने में डीसी कुल्लू ने निरमंड से लेकर मनाली के अनछुए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए एक प्रोजेक्ट तैयार कर मंजूरी के लिए सरकार के माध्यम से एशियन विकास बैंक को भेजा था। अब एशियन विकास बैंक ने मंजूरी दे दी है। इसमें जिला कुल्लू के लगभग सभी अनछुए पर्यटन स्थलों को हरी झंडी मिल गई है। इन पर्यटन स्थलों को विकसित करने में सौ करोड़ से अधिक राशि खर्च की जाएगी।
उधर, एडीबी तथा प्रदेश पर्यटन विभाग की एक संयुक्त टीम कुल्लू के अनछुए पर्यटन स्थलों के फील्ड विजिट को पहुंची है। कुल्लू, मनाली तथा बांजार के पर्यटन स्थलों का फील्ड विजिट कर पांच सदस्य टीम शुक्रवार को आनी-निरमंड का दौरा करेगी। मंजूरी मिलने से निरमंड, आनी, बंजार, कुल्लू और मनाली के अनछुए पर्यटन स्थलों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। सुंदरीकरण, बिजली, पानी, स्वच्छता, सड़क तथा शौचालय समेत तमाम मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। एशियन विकास बैंक द्वारा दी गई मंजूरी का घाटी के लोगों ने स्वागत कर खुशी जताई है।
इस संबंध में रमेश ठाकुर, मोहर सिंह, विपिन ठाकुर, राजेश कुमार, पिंकू राम, सुनील ठाकुर, ओम प्रकाश, तिलक राज, चमन लाल तथा टेक सिंह के अनुसार जिला कुल्लू के अनछुए पर्यटन को विकसित करने के लिए मिली एडीबी की हरी झंडी से न केवल घाटी के पर्यटन व धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जिला के युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर भी खुलेंगे। उपायुक्त कुल्लू युनूस ने कहा कि जिला कुल्लू के मनाली, कुल्लू, बंजार, आनी और निरमंड के करीब 40 अनछुए पर्यटकों को विकसित करने के लिए उन्होंने 103 करोड़ का प्रोजेक्ट भेजा था। जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
जिला कुल्लू के अनछुए पर्यटन स्थलों को एडीबी के द्वारा विकसित किया जाएगा। जिसमें निरमंड, बागासराहन, जलोड़ी दर्रा, सरयोलसर, रघुपुरगढ़, कटरासी, पनेउ, सोझा, शुश, शांघड़, बिजली महादेव, लगवैली, हामटा पास, चंद्रखनी, व्यासकुंड, भृगुलेख, खीरगंगा, बाहू और तीर्थन घाटी समेत कई पर्यटन स्थलों को शामिल किया गया है। इसमें कई धार्मिक पर्यटन स्थल भी हैं। जो प्राकृतिक सौंदर्य से लबालब है लेकिन सड़क, बिजली, पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं से कोसों दूर हैं।