रैला में देवता ल्क्ष्मी नारायण के हूम में मशालों से आसुरी शक्तियों को भगाते गूर और अन्य।
सैंज (कुल्लू)। घाटी के रैला में आराध्य देव लक्ष्मी नारायण का हूम (पर्व) धूमधाम से मनाया गया। वीरवार रात को क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति के लिए हूम मनाया गया। सुख-समृद्धि के लिए अंगारों पर गूरों का खेल हुआ।
रैला में ईष्ट देव के मधेउल में भगवान लक्ष्मी नारायण का पूजन हुआ। पूजन में देवता लक्ष्मी नारायण के सभी प्रमुख कारकून अनंत व्रत कर मधेउल में उपस्थित रहे।
देवता के कारदार जगरनाथ ने बताया है कि देव लक्ष्मी नारायण की पूजा के बाद सभी कारकून रक्षा का प्रतीक अनंत धागा को धारण कर देवता को पूरे विधि विधान से मधेउल से मैदान की तरफ निकले।
यहां हर घर से लाई गई मशालों के साथ ग्रामीण मेला में पहुंचे थे। मैदान में आसुरी शक्तियों को भगाने की प्रक्रिया शुरू हुई। सुख-समृद्धि, धन-दौलत और शांति के लिए जलते अंगारों पर देवता के गूरों का खेल इस पर्व का मुख्य हिस्सा रहा। देवता के पालसरा यान सिंह नेगी ने बताया कि अधर्म पर पांडवों की विजय और कौरवों के नाश से इस पर्व को जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि यहां अनंत व्रत की शुरुआत इसी काल से शुरू हुई है। देवता कमेटी के मुख्य सलाहकार गंगा राम नेगी ने बताया कि अनंत धागा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला माना जाता है।
अनंत व्रत के बारे में शास्त्रों में कहा गया है कि यह हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाता है। व्रत करने से दरिद्रता का नाश होता है और ग्रहों की बाधाएं भी दूर होती हैं।