कुल्लू। प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल सरयोलसर में माता बूढ़ी नागिन के कपाट मार्गशीर्ष संक्रांति से बंद हो जाएंगे। समुद्रतल से करीब 10,500 फुट ऊंचे इस पर्यटन और धार्मिक स्थल सरयोलसर में वास करने वाली अधिष्ठात्री माता बूढ़ी नागिन के दर्शन अगले पांच माह तक नहीं हो पाएंगे। सरयोलसर मंदिर कमेटी ने जाड़े के चलते यह कदम उठाया है। कमेटी हर साल की तरह इस वर्ष भी माता बूढ़ी नागिन के मंदिर कपाटों को संक्रांति के बाद यानी नवंबर मध्य से बंद करेगी और अब अप्रैल माह तक माता की पूजा अर्चना नहीं होगी। माता के कारदार भागे राम राणा ने कहा कि माता की वास स्थली अधिक ऊंचाई पर होने से यहां ठंड का प्रकोप अधिक बढ़ गया है। ऐसे में अब यहां श्रद्धालुओं का आना किसी खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने कहा कि जाड़े के दिनों हाड़कंपा देने वाली ठंड के चलते देवी बूढ़ी नागिन के पुजारी और अन्य कारिदें यहां नहीं रहेंगे। सर्दी के मौसम में यहां भारी हिमपात होने से माता बूढ़ी नागिन की पवित्र झील भी पांच माह तक बर्फ के आगोश में समा जाएगी। एक किलो मीटर की परिधि में बनी माता की यह पवित्र झील देशी और विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती है, लेकिन अधिक ऊंचाई होने से पवित्र झील के दर्शन अब अप्रैल में ही हो पाएंगे। राणा ने बताया कि सरयोलसर में सर्दियों के दिनों अमूमन 10-15 फुट तक बर्फ गिरती आई है। ऐसे में मंदिर कमेटी हर साल माता के देवालय को बंद करती है। उधर, माता पर अपार श्रद्धा रखने वाले गौरी शंकर, उमा ठाकुर, राम लाल समेत लाल सिंह ने बताया कि सरयोलसर में इन दिनों ठंड बढ़ गई है। ऐसे में अब भक्तों का यहां पहुंचना आसान नहीं है।
बाक्स : जलोड़ी दर्रा तथा माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली सरयोलसर में ठंड का प्रकोप बढ़ने लगा है। सुबह-शाम यहां के नदी-नालों का पानी भी जमने लगा है।
भाग चंद, पुलिस बचाव चौकी, जलोड़ी दर्रा