मनाली (कुल्लू)। हिमालयन वन एवं अनुसंधान संस्थान शिमला की ओर से बांस तकनीकी सहायता समूह भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून के सहयोग से पहाड़ी बांस ग्रामीण आजीविका में सुधार विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 17 और 18 अक्तूबर को आयोजित इस दो दिवसीय संगोष्ठी के दूसरे और अंतिम दिन डॉ. एसएस सामंत, बीएस रना, डॉ. कुलराज सिंह कपूर, डॉ. आरएन पांडेय, डॉ. एसएम नौटियाल और शंभू नाथ मिश्रा ने पहाड़ी बांस के विभिन्न आयामों एवं पहलुओं पर अपनी-अपनी प्रस्तुतियां दीं। संगोष्ठी के समापन अवसर पर डॉ. जीएस गोराया उप निदेशक अनुसंधान भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून ने इस संगोष्ठी में विभिन्न वैज्ञानिकों की ओर से प्रस्तुत किए गए शोध पत्रों पर एक संकलित प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी कि संस्तुतियां निश्चित रूप से हितधारकों तथा वन प्रबंधकाें के लिए लाभकारी सिद्ध होंगी। पहाड़ी बांस के संरक्षण एवं पैदावार की दिशा में रोजगार के भी अवसर प्रदान होंगे। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के महानिदेशक डा. अश्वनी कुमार बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि इस प्रजाति पर चर्चा एवं संगोष्ठी कि प्रस्तुतियां महत्वपूर्ण एवं दूरगामी सिद्ध होगी। महानिदेशक ने विशेष रूप से हिमालय क्षेत्र में स्थित वैज्ञानिक संस्थानों के वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे पारंपरिक रूप से अति उपयोगी एवं महत्वपूर्ण प्रजाति के लिए वैज्ञानिक अवधारणा पर आधारित नवीन परियोजनाएं तैयार करें। उन्होंने हस्तशिल्प मेला आयोजन करने के लिए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की। अंत में हिमालयन वन अनुसंधान के निदेशक डा. वीपी तिवारी ने त्योहारी मौसम में देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।