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यूरोपियन सलाद की खेती में बढ़ा किसानों का रूझान

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यूरोपियन सलाद की खेती में बढ़ा किसानों का रुझान
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रोपाई करने में जुटे लोग, सैकड़ों बीघा में हो रही खेती
एक बीघा जमीन में 35 हजार रुपये की हो रही कमाई
उमर उजाला ब्यूरो
खराहल (कुल्लू)। मौसम अनुकूल होते ही किसानों ने खेत-खलियान का रुख कर लिया है। इन दिनों किसान यूरोपियन सलाद की रोपाई करने में व्यस्त हो गए है। अमूमन यूरोपियन सलाद की रोपाई फरवरी के अंतिम पखवाडे़ में की जाती है। समय पर रोपाई करने से सलाद का उत्पादन उम्दा किस्म का होता है। यूरोपियन सलाद की खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ता जा रहा है। इसकी मांग पांच सितारा होटलों और रेस्तरों में अधिक होती है। लिहाजा, किसानों को बेहतर दाम भी मिल जाते हैं। जिले में कई क्षेत्रों में इसकी खेती हो रही है। बताया जा रहा है कि अच्छी फसल से एक बीघा भूमि से करीब 35 हजार रुपये की कमाई एक सीजन में हो जाती है। जिले में सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर खेती हो रही है। विशेषज्ञों को कहना है कि कुल्लू जिला की आबोहवा यूरोपियन सलाद के लिए उपयुक्त है। हालांकि इस साल बर्फबारी और बारिश समय पर न होने के कारण इसकी रोपाई में विलंब हो गया। घाटी के किसान सुरेश पुजारी, ऋषि राज, कमल, संजय, रमेश, चमन आदि का कहना है कि एक बीघा भूमि में 35 हजार रुपये की कमाई एक सीजन में अर्जित होती है। उन्होंने कहा कि एक सीजन में सलाद का कटान पौधे से तीन बार किया जाता है। कुल्लू के सेउबाग, हुरला, करंजा, गाहर, बंदरोल आदि इलाके में इसकी पैदावार हो रही है। इस संबंध में कृषि विभाग के उपनिदेशक रतन भारद्वाज कहते हैं कि कुल्लू जिले में यूरोपियन सलाद की खेती सैकड़ों बीघा भूमि में हो रही है। यहां की जलवायु विदेशी सब्जियों के लिए अनुकूल है। किसानों को इसकी खेती से अच्छी कमाई हो रही है।
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