अमर उजाला ब्यूरो
गुशैणी (कुल्लू)। तीर्थन घाटी के गांव बांदल की आराध्य देवी माता गाड़ादुर्गा के मुआफी मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। बंजार खंड के देवी-देवता कारदार संघ की बैठक में माता गाड़ादुर्गा के वाद्ययंत्रों को न बजाने वाले बजंतरियों का मुद्दा उठा। माता के कारदार मुरारी लाल शर्मा ने कहा कि माता के बजंतरियों ने वाद्य यंत्रों को बजाना छोड़ दिया है। बजंतरी माता गाड़ादुर्गा के मुजारे हैं। माता की जमीन केवल मात्र बजंतरियों को वाद्ययंत्रों को बजाने के लिए दी गई है। इसके उपरांत बंजार खंड के कारदारों ने प्रस्ताव पारित कर उपायुक्त के आग्रह करते हुए कहा कि बजंतरियों को वाद्ययंत्र बजाने की परंपरा को बहाल करने के दिशा-निर्देश दें जिससे सदियों से चली आ रही परंपरा कायम हो सके। इधर दशहरा उत्सव शुरू होने से पहले मुआफी मामले के जोर पकड़ने के बाद तीर्थन घाटी में चर्चाओं का माहौल है।