आयोग सदस्य ने किया बौद्ध बिहार का भ्रमण
केंद्र से उठाएंगे मठों के जीर्णोद्धार का मामला : सुलेखा
अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य सुलेखा ने मंगलवार को लाहौल घाटी के शिशुर, गैमूर और जिस्पा मठों सहित ज्योति बौद्ध बिहार का भ्रमण किया। उन्होंने यहां स्थानीय लोगों और बौद्ध भिक्षुओं से मिलकर उनकी समस्याओं को जाना। जिस्पा में आयोजित बुद्ध जयंती कार्यक्रम में शिरकत करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं शांति, मैत्री और मानव कल्याणकारी है। उन्होंने कहा कि आज भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। बाबा आंबेडकर ने भी बौद्ध धर्म को अपनाकर भारत को क्षमता, शांति, धर्म और जाति से ऊपर उठकर एकजुट होने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में बुद्धिस्ट सर्किट बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मठों के लिए संपर्क मार्ग बनें और वहां पर सोलर सिस्टम की भी व्यवस्था हो। इसके साथ ही मठों के जीर्णोद्धार के लिए बजट का प्रावधान करने के लिए आयोग के माध्यम से मामला भारत सरकार से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भोटी भाषा को संविधान की सूची में शामिल किया जा सके, इसके लिए भी केंद्र और राज्य सरकार से मामला उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गैमूर में डॉ. टशी पलजोर की ओर से स्थापित लाइब्रेरी को ई-लाइब्रेरी बनाने का मामला भारत सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। लाहौल और पांगी में प्रसार भारती का अपना रेडियो स्टेशन स्थापित करने का मामला आयोग के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर पूर्व विधायक रवि ठाकुर, दारचा पंचायत प्रधान सोनम डोलगा, जिला परिषद सदस्य छिमे, गैमूर लाइब्रेरी के संस्थापक, लेह विश्व विद्यालय के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. टशी पलजोर सहित विभिन्न मठों के बौद्ध भिक्षु और गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे।