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प्रशिक्षु पटवारियों को नहीं मिल रहा स्टाइपंड

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केलांग (लाहौल-स्पीति)। प्रदेश सेटलमेंट और राजस्व विभाग में प्रशिक्षण ले रहे प्रदेश के सैकड़ों पटवारियों को पिछले छह महीने से स्टाइपंड नहीं मिला है। इसके चलते प्रशिक्षु पटवारी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। हिमाचल में प्रशिक्षुओं को प्रति माह स्टाइपंड मिलने की व्यवस्था है, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण प्रदेश के सैकड़ों प्रशिक्षुओं को स्टाइपंड समय पर नहीं मिल पा रहा है। सवाल उठ रहा है कि हाजिरी सूची समय पर भेजने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में अभी तक यह हाजिरियां क्यों नहीं पहुंच पाई हैं? प्रशिक्षु पटवारी रमेश, बीना, रोहित, निशा, विवेक और देकिद ने बताया कि उन्हें मई 2017 के बाद अभी तक स्टाइपंड की राशि नहीं मिल पाई है। सरकार की ओर से प्रशिक्षु पटवारियों को हर माह तीन हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान है। यह प्रशिक्षण दो सालों की अवधि तक दिया जाता है। बताया जा रहा है कि ऊना और सिरमौर के प्रशिक्षु पटवारियों को स्टाइपंड की राशि जारी हो चुकी है, लेकिन शेष दस जिलों के करीब 978 प्रशिक्षु पटवारियों को स्टाइपंड नहीं मिल पाया है, जिसे हर महीने प्रशिक्षुओं के बैंक खाते में डाला जाना था। मई माह के बाद सैकड़ों प्रशिक्षु स्टाइपंड मिलने के इंतजार में हैं। इधर, राजस्व प्रशिक्षण संस्थान जोगिंद्रनगर के संयुक्त निदेशक अश्विनी चौधरी का कहना है कि प्रशिक्षु पटवारियों को हर महीने स्टाइपंड दिया जा रहा है। जबकि इसी संस्थान के कर्मचारी का कहना है कि कुछ प्रशिक्षु पटवारियों के संबंधित बंदोबस्त सर्किल कार्यालय से हाजिरी की सूची उन्हें नहीं मिली है। इसीलिए स्टाइपंड जारी करने में देरी हो रही है। वहीं कुल्लू में तैनात बंदोबस्त विभाग के सहायक बंदोबस्त अधिकारी सतीश कुमार का कहना है कि उनके कार्यालय से हर महीने प्रशिक्षु पटवारियों की हाजिरी सूची धर्मशाला बंदोबस्त कार्यालय जाती है। उधर, धर्मशाला में तैनात बंदोबस्त अधिकारी प्रशिक्षण पर प्रदेश से बाहर हैं।
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