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कैंकर रेग की चपेट में आए सेब बगीचे

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अमर उजाला ब्यूरो
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खराहल (कुल्लू)। सर्दियों में सेब बगीचों में कई बीमारियां काटछांट के समय नजर आने लगी हैं। इन दिनों पौधों से पत्ते झड़ गए हैं, जिसके चलते कई बीमारियां स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। इन्हीं में एक प्रमुख रोग कैंकर सेब के पौधों पर पनप रहा है। ऐसे में कई पौधे बीमारी की चपेट में आने से सूखने लगे हैं। इससे अत्यधिक रोग से ग्रस्त पौधों को बागवान काटने को मजबूर हो रहे हैं। इतना ही नहीं, यह बीमारी नाशपाती के पौधों पर भी अपने पांव पसारने लगी है। इस बीमारी का कहर कुल्लू के तमाम बगीचों में दिख रहा है। आलम यह है कि सूख रहे पौधों को बागवानों को मजबूरन काटना ही पड़ रहा है। हालांकि, बागवान इन दिनों प्रूनिंग करते समय ब्लाईटॉक्स दवाई भी पौधों पर लगा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सेब बगीचों में कैंकर चार किस्म से अमूमन फैलता है। काली सड़न, गुलाबी बीमारी तथा भूरा वृत्त आदि है। घाटी के बागवान महेश शर्मा, ज्ञान ठाकुर, कर्मचंद, श्याम शर्मा, चमन, देवराज नेगी, अशोक ठाकुर तथा चुनी लाल आदि का कहना है कि इन दिनों उनके बगीचों में कैंकर रोग का कहर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। ऐसे में पौधे बीमारी की जद में आने के कारण सूखने लगे हैं। बागवानों का कहना है अब रोग नाशपाती के पोधों पर भी रोग पनप रहा है। मौसम में परिवर्तन के चलते भी कई बीमारियां पौधों में पनप रही हैं। समय पर बर्फबारी और बारिश न होना भी बीमारी के पनपने का कारण है। इस संबंध में बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजकुमार शर्मा कहते हैं कि असंतुलित खाद डालने तथा पौधों की गलत प्रूनिंग करने से भी कैंकर रोग पौधों में अधिक पनपता है। लिहाजा, बागवानों को संतुलित खाद और उचित तरीके से काटछांट करनी चाहिए। रोग ग्रस्त पौधों की टहनियों को तेज चाकू से साफ करें और फिर ब्लाइटॉक्स दवा का लेप घाव पर लगाएं। इससे रोग पर नियंत्रण हो सकता है।
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