बंजार (कुल्लू)। बंजार अस्पताल में बिजली गुल होते ही परिसर में अंधेरा छा जाता है। बिजली जाने पर यहां पर मरीजों और तीमारदारों को मोमबत्ती जलानी पड़ती है। अस्पताल में जनरेटर की सुविधा लोगों को नहीं मिल पा रही है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन के पास दो जनरेटर हैं। बावजूद इसके इन्हें बिजली चले जाने पर चालू नहीं किया जाता है। बंजार अस्पताल में पहले ही डॉक्टरों की कमी है। वहीं अस्पताल अपने नए भवन की राह देख रहा है। स्वास्थ्य विभाग की चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर घाटीवासियों में विभाग व सरकार के प्रति रोष है। स्थानीय निवासी अनूप सिंह, सूरज, श्याम लाल, रोशन, बंटू और नरेश ने कहा कि डॉक्टरों की कमी के चलते मरीज परेशान हैं। अस्पताल में बिजली चली जाती है तो जनरेटर नहीं चलाए जाते हैं। मरीजों व तीमारदारों को अंधेरे में बैठना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन को प्राथमिकता के आधार पर जनरेटर चालू कर अस्पताल आने वाले लोगों को सुविधा मुहैया करवानी चाहिए। इधर बीएमओ रमेश चंद शर्मा ने कहा कि अस्पताल का भवन पुराना है। दो जनरेटरों को अंदर व बाहर चलाने की सुविधा नहीं है। इसका प्रबंध किया जा रहा है। बिजली चले जाने पर जनरेटरों को सुचारू कर दिया जाएगा। वहीं बीते दिनों खाड़ागाड़ वार्ड से जिला परिषद सदस्य सुरेंद्र शौरी ने भी बंजार सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था तो इस दौरान अस्पताल भवन में मरीज बेड पर अंधेरे में बैठ हुए थे। सुरेंद्र शौरी के अनुसार जब स्टाफ से बिजली की व्यवस्था को लेकर पूछा गया तो एक कर्मचारी ने बताया कि जनरेटर है जिन्हें चलाने की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बीएमओ से समस्या को दूर करने का आग्रह किया।