ताया-भतीजा की हार से कुल्लू राजघराना हाशिए पर
महेश्वर को कुल्लू और आदित्य को बंजार से मिली हार
अमी चंद भंडारी
खराहल (कुल्लू)। जिला कुल्लू के राजघराने के ताया-भतीजा को 13वें विधानसभा के चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। दोनों नेता अलग-अलग पार्टी से चुनाव लड़ रहे थे। कुल्लू सदर से भाजपा के उम्मीदवार महेश्वर सिंह को कांग्रेस के सुंदर सिंह ठाकुर ने पटकनी दी है। वहीं, बंजार विस से भाजपा के प्रत्याशी सुरेंद्र शौरी ने आदित्य विक्रम सिंह को पराजित कर पहली बार विधानसभा में पहुंचने का सौभाग्य हासिल किया है। कुल्लू और प्रदेश में कुल्लू राजघराने की तूती बोलती थी लेकिन इस बार की हार से एक बार फिर पांच साल तक विधानसभा सदन के चौखट पर नजर नहीं आएंगे। ऐसे में कुल्लू राजघराना एक बार फिर से सियासत से हाशिए पर आ गया है। राजनीतिक परिदृश्य पर नजर डालें तो राजघराना का राजनीति में साठ के दशक से राजा महेंद्र सिंह ने प्रवेश किया था। 1975 से महेश्वर सिंह राजनीति में सक्रिय हैं और 1977 में बंजार विस क्षेत्र में दिले राम शबाब को पटकनी दी थी। लोकसभा के दो बार और राज्य सभा के एक बार सदस्य बने। दो बार विधायक भी चुने गए थे। लेकिन लंबे अनुभव के बावजूद इस बार कुल्लू विस क्षेत्र से 1538 मतों से पराजय का मुंह देखना पड़ा। स्वर्गीय कर्ण सिंह तीन बार बंजार से विधायक बने और 27 अगस्त 2015 को आयुर्वेद एवं सहकारिता मंत्री बने थे। लेकिन अपने कार्यकाल को पूरा करने से सात माह पूर्व दुर्भाग्य से आकस्मिक निधन हो गया। ऐसे में इस बार उनके पुत्र आदित्य विक्रम सिंह को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया था। लेकिन, चुनाव में जीत का परचम लहराने में नाकाम हुए। वहीं, महेश्वर सिंह भी हैट्रिक बनाने में चूक गए। बहरहाल, लोगों में आम चर्चा है कि इस हार ने कुल्लू का राजघराना एक बार फिर से सियासत से हाशिए पर धकेल दिया है।