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Kangra News: मैक्लोडगंज में जुटे अमेरिका, ताइवान, हांगकांग और चीन के कार्यकर्ता

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धर्मशाला। तिब्बत नीति संस्थान की ओर से मंगलवार को धर्मशाला में फाइंडिंग कॉमन ग्राउंड : स्ट्रैटेजिक रिस्पॉन्स इन ए चेंजिंग ग्लोबल ऑर्डर नामक एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। इसमें चीन, अमेरिका, हांगकांग और ताइवान के कार्यकर्ता चीन की शी जिनपिंग सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ लड़ाई पर जानकारी और अपने विचार साझा करने पहुंचे। इस दाैरान तिब्बत नीति संस्थान के उप निदेशक तेंपा ग्यालत्सेन ने कहा कि संगोष्ठी के तीन प्रतिभागी ताइवान, अमेरिका और हांगकांग से हैं जबकि एक स्वतंत्रता कार्यकर्ता चीन से हैं। ये सभी चीनी सरकार से आजादी के लिए लड़ रहे हैं।
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अमेरिका में रहने वाले एक चीनी स्वतंत्रता कार्यकर्ता डेविड यू ने कहा कि तिब्बत नीति संस्थान ने हमें तिब्बती समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों पर चीनी परिप्रेक्ष्य प्रदान करने के लिए आमंत्रित किया है। विशेष रूप से चीन में जो हो रहा है, वहां जिनपिंग सरकार ने समाज पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। सूचनाओं को सख्त कर दिया है और चीनी और तिब्बतियों दोनों के लिए सीमाओं के पार आदान-प्रदान को कठिन बना दिया है और हम इन मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।
प्रवासी स्थिति के बारे में होगी बात : ताइवान-हांगकांग एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष सांग पु ने कहा कि हम यहां प्रवासी स्थिति के बारे में बात करने के लिए आए हैं। क्योंकि सभी जानते हैं कि 2020 के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और इस साल की शुरुआत में अनुच्छेद 23 कानून के बाद हांगकांग में अभिव्यक्ति स्वतंत्रता में गिरावट आई है। इसका मतलब अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता की सभी गिरावट और पतन को कम करना है और मेरे कई दोस्तों को हांगकांग की जेलों में भेजा जा रहा है। भारत को धन्यवाद, जिसने तिब्बतियों को रहने के लिए जगह दी है।
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