धर्मशाला। सूबे में भले ही बारिश और बर्फबारी देरी से हुई है, लेकिन इससे जलशक्ति विभाग को बड़ी राहत मिली है। खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्र में बर्फबारी और बारिश ने पेयजल किल्लत दूर कर दी है। हाल ही में हुई बर्फबारी और बारिश से जलशक्ति विभाग की पेयजल योजनाओं के जलस्रोत 25 फीसदी तक रिचार्ज हो गए हैं। सबसे अधिक पेयजल योजनाएं जिला चंबा में हैं। यहां करीब 800 पेयजल योजनाएं हैं, जो छोटे-छोटे नालों पर स्थापित हैं। वहीं, कांगड़ा जिला में 475 पेयजल स्कीमें हैं।
पूर्व में अक्तूबर 2023 से लेकर जनवरी 2024 तक बहुत कम बारिश और बर्फबारी हुई है। इस बार सूखे का प्रभाव लंबे समय तक रहा है। इस वजह से प्रदेश में कई नाले सूख गए थे। खड्ड और नदियों में भी जलस्तर काफी नीचे पहुंच चुका था, लेकिन अब बारिश और खासकर बर्फबारी के कारण प्राकृतिक पेयजल स्रोतों का जलस्तर बढ़ा है। बारिश से सिंचाई योजनाओं को भी लाभ मिला है। जलशक्ति विभाग की परेशानी कम हुई है।
विभाग का मानना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सूखे के कारण अधिक प्रभाव पड़ता है। क्योंकि वहां पर नाले और खड्ड आदि पर पेयजल योजनाएं स्थापित हैं। जबकि मैदानी क्षेत्रों में नलकूप के अलावा नदियों से पानी आदि लिफ्ट कर लोगों की प्यास बुझाई जा रही है।
बयान-
बारिश और खासकर बर्फबारी से प्राकृतिक पेयजल स्रोतों का फायदा हुआ है। जलस्रोत 25 फीसदी तक रिचार्ज हुए हैं। पूर्व में सूखे के कारण कई पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई थीं, लेकिन अब बर्फबारी से राहत मिली है। हालांकि उम्मीद के अनुरूप बर्फबारी कम हुई है।
-सुरेश महाजन, मुख्य अभियंता, जलशक्ति विभाग उत्तरी क्षेत्र धर्मशाला