धर्मशाला। मरने के 20 दिन बाद भी एक तिब्बती बौद्ध भिक्षु समाधि में लीन है। यह दावा निर्वासित तिब्बत सरकार ने किया है। निर्वासित तिब्बत सरकार का दावा है कि दक्षिण भारत के गेदेन जंस्टे मठ का बौद्ध भिक्षु गेशे तेंम्पा धरग्याल 20 दिन से समाधि में चला गया है। हालांकि, डॉक्टरों ने उसे क्नीनिकल डेड यानी मृतक घोषित किया है, लेकिन 20 दिन बाद भी उसका शरीर जीवित व्यक्ति की तरह है। शरीर अभी तक खराब नहीं हुआ है। चेहरे पर आभा झलक रही है। निर्वासित तिब्बत सरकार के धर्म एवं संस्कृति विभाग के अनुसार तिब्बती संस्कृति में यह क्रिया थुकदम कहलाती है, यानी, समाधि में जाना। तिब्बती भाषा के थुक शब्द का अर्थ दिमाग और दम का अर्थ समाधि की अवस्था होता है। इसके अनुसार मृत्यु के बावजूद शरीर संरक्षण के बिना भी जीवित मनुष्य की भांति तरोताजा रहता है। बौद्ध भिक्षु गेशे तेंम्पा धरग्याल का जन्म 23 अप्रैल 1934 को तिब्बत के खाम तावो इलाके में हुआ था। 20 वर्ष की आयु में उन्होंने तिब्बत में गेदेन जंस्टे मठ में शिक्षा लेना शुरू की थी। 1959 में तिब्बत से भागकर उन्होंने भारत में शरण ली थी। गौरतलब है कि वर्ष 2018 में रूस के छह सदस्यीय वैज्ञानिकों के दल ने तिब्बत की थुकदम क्रिया को समझने की कोशिश की थी।