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Kangra News: सड़क पर दलदल का दरिया है और डूब के जाना है...

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धर्मशाला। यह सफर नहीं आसान, दलदल का दरिया है, बस डूब के जाना है...। यह पंक्तियां आजकल पठानकोट से मंडी के लिए बन रहे फोरलेन पर सफर करने वाले वाहन चालकों पर स्टीक बैठती हैं। पहले यह नेशनल हाईवे था, लेकिन इस नेशनल हाईवे को जैसे ही फोरलेन में तबदील करने का कार्य शुरू हुआ, वैसे ही लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। बारिश के कारण 32 मील और द्रम्मण समेत अन्य जगहों पर निर्माणाधीन फोरलेन कीचड़ के तालाब में तबदील हो चुका है। आसपास की कूहलों और निकासी नालियों का पानी निर्माणाधीन फोरलेन पर बह रहा है।
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इस कच्चे मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे, पत्थर और रेत पड़ी हुई है। इससे खासकर दोपहिया वाहन चालक फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। वहीं बसें, ट्रक और अन्य भारी वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। मालाभाड़ा से अधिक रकम तो वाहनों के कलपुर्जों पर खर्च हो रही है। पंजाब और जम्मू कश्मीर से नूरपुर के रास्ते आने वाले पर्यटक अब हिमाचल में पैर रखने से कतराने लगे हैं। पर्यटन कारोबार प्रभावित हो रहा है। फोरलेन के आसपास दुकानों का धंधा भी चौपट हो गया है।

क्या कहते हैं लोग-
-गांव बग्गा निवासी नानक चंद का कहना है कि फोरलेन का कार्य धीमी गति से चल रहा है। जिससे लोग परेशान हो रहे हैं। यहां पैदल चलना भी मुश्किल है। खासकर बारिश में दिक्कतें बढ़ रही हैं।
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-गांव 32 मील के निवासी पवन कुमार का कहना है कि फोरलेन निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार के चलते लोग बहुत ही परेशान हैं एनएचएआई को फोरलेन का कार्य में तेजी लाने के निर्देश देने चाहिए।

-रविंद्र शर्मा निवासी गांव 32 मील का कहना है कि फोरलेन निर्माण कार्य के चलते पिछले एक वर्ष से 32 मील-त्रिलोकपुर-कोटला संपर्क मार्ग बड़े वाहनों के लिए बिलकुल ही बंद है, लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है

-गांव छतड़ी में बाइक रिपेयर का काम करने वाले विक्की ने बताया कि डेढ़ साल से यहां पर फोरलेन का काम चल रहा है। अधिकतर जगह अभी तक नालियां ही नहीं बनी हैं। उनकी दुकान फोरलेन से काफी नीची रह गई है। अब काम मानों चौपट हो गया है। दुकान में धूल मिट्टी आने के कारण कोई ग्राहक नहीं आता है।

यह है फोरलेन परियोजना:
पठानकोट से मंडी के लिए प्रस्तावित फोरलेन कुल नौ पैकेज में विभाजित है। इसमें चार सुरंगें, आठ बाईपास और एक रेलवे ओवरब्रिज शामिल है। वर्तमान में पठानकोट से मंडी के बीच की दूरी 197 किलोमीटर है। फोरलेन बनने से यह दूरी घटकर 179 रह जाएगी। कोटला में 750 मीटर और त्रिलोकपुर में 450 मीटर लंबी सुरंग बन चुकी हैं। अभी कछियारी और मंडी के बिजनी में दो सुरंगों की डीपीआर का कार्य चल रहा है। नूरपुर, कोटला, भाली, रैत, नगरोटा बगवां के मलां समेत अन्य प्रमुख कस्बों में बाईपास भी प्रस्तावित हैं।
ऐसे तो दो साल में भी पूरा नहीं होगा काम, मटौर से शिमला फोरलेन का कार्य तेज
ढाई साल पहले पठानकोट से मंडी के लिए प्रस्तावित फोरलेन का कार्य शुरू हुआ है, लेकिन जिस गति से यह कार्य चल रहा है, उसे देख लगता है कि आगामी दो साल में भी यह फोरलेन बनकर तैयार नहीं होगा। उपमंडल नूरपुर के जसूर कस्बे में नवंबर 2023 में फ्लाइओवर पर स्लैब डालने के लिए पिलर पर शटरिंग चढ़ाई थी, लेकिन एक साल बीतने पर भी यह शटरिंग अभी तक नहीं उतारी गई। अगर इसी तरह अन्य फ्लाईओवर में भी शटरिंग लंबे समय तक चढ़ती रही तो निर्माण कार्य की गति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं, इसके बाद शुरू हुआ मटौर से शिमला फोरलेन का कार्य तेज गति से चल रहा है। इस मार्ग पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी अन्य के मुकाबले काफी बढि़या है।

कोट्स:
जसूर में फ्लाईओवर बनाने के लिए जो पिलर पर शटरिंग लगी है, उसे एक निश्चित समय के बाद ही उतारा जाएगा। ताकि मजबूती और गुणवत्ता बनी रहे। बरसात का मौसम है। जहां पर कटिंग कार्य चल रहा है, वहां पर पानी का रिसाव होना तय है।
-विकास सूरजेवाला, परियोजना निदेशक फोरलेन

एनएचएआई के अधिकारियों को फोरलेन के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। फोरलेन के धीमे कार्य से स्थानीय लोगों और सफर करने वाले वाहन चालकों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
-केवल सिंह पठानिया, विधायक एवं उपमुख्य सचेतक


फोरलेन के निर्माण कार्यों के कारण लोगों को पेश आ रही दिक्कतों को जल्द दूर करने के लिए एनएचएआई को निर्देश दिए जाएंगे। एनएचएआई के अधिकारियों को खुद भी इस संबंध में ध्यान देना चाहिए था, लेकिन अब मामला ध्यान में आया है, जल्द कार्रवाई की जाएगी।
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-हेमराज बैरवा, उपायुक्त एवं चेयरमैन, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, कांगड़ा
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