धर्मशाला। किसी भी महामारी, एड्स और टीबी सहित अन्य गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए लोगों को कैसे सही जानकारी मिलेगी, जब स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त स्वास्थ्य शिक्षक (हेल्थ एजुकेटर) ही नहीं हैं। जिला कांगड़ा में हेल्थ एजुकेटरों के 16 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से नौ पद खाली चल रहे हैं। इस वजह से स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को किसी बीमारी या नशे के दुष्प्रभावों और उपायों के प्रति जागरूक नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं, सरकार की ओर से स्वास्थ्य विभाग में चलाई जा रही योजनाओं की भी जानकारी नहीं मिल पा रही है। इसका खामियाजा जिले की जनता को झेलना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग में अधिकतर पद खाली होने से सरकार की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे हवा नजर आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हेल्थ एजुकेटरों के पद तो खाली ही हैं, इसके अलावा पुरुष स्वास्थ्य और महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों के 70 फीसदी से अधिक पद खाली चल रहे हैं। जिला कांगड़ा में पुरुष स्वास्थ्य कर्मचारियों के 445 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से केवल 27 कर्मचारी जिले का भार संभाल रहे हैं। इसके अलावा महिला स्वास्थ्य कर्मियों के 461 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 285 पद खाली पड़े हैं। ऐसे से ग्रामीण क्षेत्र में गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता नहीं फैल पा रही है। इसके अलावा जिले भर में हेल्थ सुपरवाइजरों के भी 48 पद खाली चल रहे हैं।
स्वास्थ्य कर्मचारियों का काम सरकार की योजनाओं को धरातल पर लोगों पर पहुंचाना होता है। इसके अलावा कई प्रकार के सर्वे, डाटा एकत्रित करना आदि कई कार्य शामिल हैं। मौजूदा समय में स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी और ए़ड्स के खात्मे और जागरूकता के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें धरातल पर लोगों तक पहुंचाने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण और चंगर क्षेत्रों के अधिकतर लोग आज भी कई चीजों से अनजान हैं।
स्वास्थ्य विभाग में खाली चल रहे पदों के बारे में समय-समय पर सरकारों को अवगत करवाया जाता है, लेकिन पद भरना सरकार के हाथ में है। जैसे ही सरकार से अनुमति मिल जाएगी तो इन पदों को भर दिया जाएगा, जिससे कि लोगों में सही से जानकारी और जागरूकता फैल सके।
- डॉ. राजेश सूद, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, कांगड़ा