डमटाल (कांगड़ा)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पराल में स्टाफ की कमी होने के कारण बच्चों का भविष्य अंधकार में है। शिक्षा विभाग की इतनी बड़ी लापरवाही से बच्चे अपने शिक्षा के अधिकार से वंचित होते नजर आ रहे हैं, क्योंकि पराल स्कूल में कुल 162 बच्चों को मात्र तीन अध्यापक ही संभाल रहे हैं, जबकि स्कूल की 11वीं और 12वीं कक्षाओं के लिए तो एक भी अध्यापक पढ़ाने के लिए उपलब्ध नहीं है।
स्कूल स्टाफ में अंग्रेजी, हिंदी, इतिहास, संस्कृति और आईटी के प्रवक्ता के पद खाली पड़े हैं, जबकि टीजीटी मेडिकल और टीजीटी आर्ट्स के प्रवक्ता सहित भाषा, संस्कृत, ड्राइंग और शारीरिक शिक्षा के अध्यापकों के पद भी खाली पड़े हैं। यहां तक स्कूल में अभी प्रिंसिपल का पद भी नहीं भरा गया है। स्कूल स्टाफ में भारी कमी को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने पर मजबूर हैं। पराल और मलकाना पंचायत के ग्रामीणों ने कहा कि उनके बच्चों को सरकार शिक्षा से वंचित करती दिख रही है जिस कारण उनमें भारी रोष होना स्वाभाविक है।
स्कूल प्रबंधन समिति की प्रधान राधा रानी अनुसार उन्होंने स्कूल की इस समस्या को लेकर धरना-प्रदर्शन सहित शिक्षा विभाग को कई बार इस समस्या से अवगत करवाया है 1100 नंबर पर कई शिकायतें दर्ज करवा चुके हैं। यहां तक कि वार्षिक स्कूल समारोह में विधायक मलेंद्र राजन को बतौर मुख्यातिथि बुलाकर समस्या के हल की मांग की गई थी, लेकिन किसी ने भी इस समस्या का हल नहीं निकाला है।
शिक्षा उपनिदेशक कांगड़ा मोहिंद्र धीमान ने बताया कि अचार संहिता खत्म होने के बाद ही इस मामले में सरकार और विभाग की ओर से कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।