पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश किसानों की अच्छी फसल के लिए अक्तूबर से नंवबर के मध्य तक की जाने वाली गेंहू और अन्य सब्जी की फसलों को लेकर कृषि विवि पालमपुर के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। इसमें प्रदेश के निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्र के किसान सिंचित और असिंचित क्षेत्र के लिए गेहूं की बिजाई अक्तूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के मध्य तक कर सकते हैं। इसमें वे गेहूं की एचएस-542 और वीएल-829 जबकि जौ की हिम पालम जौ-1, हिम पालम जौ-2 और एचबीएल 113 किस्में लगा सकते हैं। गेहूं के बीज को बिजाई से पहले फफूंदनाशक बैविस्टिन 2.5 ग्राम या वीटावैक्स 2.5 ग्राम या रैक्सिल 1.0 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े में चने की बिजाई की जा सकती है।
अच्छे जल निकास वाली दोमट और रेतीली ढेलों वाली भूमि चने की खेती के लिए उत्तम होती है। हिमाचल चना-2, हिमाचल चना-1 और जीपीएफ-2 किस्मों को 30 सेंटीमीटर की दूरी पर जबकि एचपीजी-17 किस्म को 50 सेंटीमीटर की दूरी पर कतारों में बिजाई करें। बीज को 10 सेंटीमीटर गहरा डालें अन्यथा कम गहरी बुआई करने पर उखेड़ा या विल्ट रोग लग सकता है। बीज को बैवस्टिन से उपचार करें। मसर की विपाशा और मारकंडे किस्म प्रदेश के लिए अनुमोदित किस्म है। यदि बीज की बिजाई में देरी होती है तो उस परिस्थिति में बीज की मात्रा 20-25 प्रतिशत अधिक डालें।
मसर की बिजाई 20-25 सेंटीमीटर की दूरी पर पंक्तियों में करें। इस समय राया की किस्म आरसीसी.-4 व करण राई, गोभी सरसों की किस्म नीलम, शीतल व ओएनके-1, भूरी सरसों की किस्म केबीएस-3 की बिजाई करें। गोभी सरसों को 45 सेंटीमीटर की दूरी पर पंक्तियों में लगाएं। अन्य तिलहनी फसलों की बीजाई 30 सेंटीमीटर दूरी पर पंक्तियों में केरा विधि से करें। अधिक पैदावार लेने के लिए गोभी सरसों (नीलम)-चना के 1:1 अतराल अपनाने की सिफारिश की जाती है। जबकि बिजाई के समय ईफको मिश्रण खाद 4-5 किलो ग्राम अवश्य डालें।
निचले पर्वतीय क्षेत्रों में करेें मटर की अगेती किस्म की बिजाई
प्रदेश के निचले पर्वतीय क्षेत्रों में मटर की अगेती किस्म पालम त्रिलोकी, अरकल, वीएल-7 और मटर अगेता की बिजाई करें। इस समय लहसुन बिजाई का उचित समय है। निचले पर्वतीय क्षेत्रों में लहसुन की किस्म जीएचसी-1, एग्री-फाउंड पार्वती या सोलन सलेक्सन की बिजाई कतारों में 15 सेंटीमीटर और बीज की आपस में दूरी 10 सेंटीमीटर रखें। इन्हीं क्षेत्रों में पालक, मेथी, धनिया, मूली, गाजर व शलजम की सीधी बिजाई एवं चाइनीज बंदगोभी, फूलगोभी, बंदगोभी, गांठगोभी और ब्रोकली की तैयार पौध की रोपाई उचित दूरी पर करें। जबकि मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में फूलगोभी, बंदगोभी, गांठगोभी, चाईनीज़ बंदगोभी और ब्रोकली की तैयार पौध की रोपाई करें। मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में मूली, (पूसा हिमानी, मीनो अर्ली, आल सीजऩ), शलजम (पीटीडब्ल्यूजी), पालक (पूसा हरित, पूसा भारती,आलग्रीन), मेथी (पालम सौम्य, पूसा कसूरी, आईसी-74) तथा लहसुन (जीएचसी-1, एग्री-फाउंड पार्वती) आदि की भी बिजाई करें। प्याज की नर्सरी तैयार करने का यह उचित समय है।