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प्रभु की निष्काम भक्ति मनुष्य के संपूर्ण दुखों का समाधान : अतुल कृष्ण

Mon, 02 Jun 2025 01:20 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
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नाग मंदिर, रक्कड़ में चल रही ​शिव महापुराण कथा का आनंद लेते हुए संगत। स्रोत: आयोजक
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रक्कड़ (कांगड़ा)। मनुष्य के संपूर्ण दुखों का समाधान प्रभु की निष्काम भक्ति है। जो आत्मज्ञान से संपन्न है, उसे कर्म बंधन में नहीं फंसना होता, जिसका चित्त परमात्मा में लगा हुआ है उसके सारे मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। यह प्रवचन शिव महापुराण कथा के समापन अवसर पर अतुल कृष्ण महाराज ने नाग मंदिर रक्कड़ में दिए। उन्होंने ईश्वरीय कृपा से असंभव भी संभव में बदल जाता है। बार-बार कथा सुनने से हम व्यर्थ की चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं। हमें अपनी दृष्टि प्रभु की ओर करनी है संसार अपने आप हमारे अनुकूल हो जाएगा। राम के बिना कोई ठांव नहीं। सुख की कामना ही हमें भटकाती है। आत्मज्ञान ही परम सत्य तक पहुंचने का श्रेष्ठ मार्ग है। उन्होंने कहा कि अविभक्त एवं सर्वत्र है इस महा ईश्वरवाक्य की सिद्धि ही साधना का अमर फल है। जीवन में साधना की गहराई लानी होगी। जरा सी बात पर खिन्न हो जाना हमारी क्षुद्रता को ही स्पष्ट करता है। साधक जब तक विशाल हृदय वाला नहीं बनेगा, तब तक विराट परमात्मा को कैसे समेट पाएगा। ज्ञान या भक्तिपूर्वक अपने अस्तित्व को मिटा देने से भक्त और भगवान की दूरी समाप्त हो जाती है। सोने और उसके आभूषण में द्वैत दिखता है पर है नहीं। इसी प्रकार हम प्रभु से न तो दूर हैं और न ही भिन्न। इस तत्व को जान लेने से दुखों का स्वत ही शमन हो जाता है। रविवार को कथा में अश्वत्थामा, अत्रीश्वर, ऋशिकेश्वर, यतिनाथ और भिक्षुवर्य अवतार का प्रसंग सहित अनेक भक्तों पर भगवान की कृपा एवं शिव भक्तों के लक्षण सभी श्रोताओं ने बड़ी तन्मयता से सुना।
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