धर्मशाला। जीवन में बढ़ते तनाव और अन्य कारणों से दुनिया भर में सोरायसिस के मामलों में कुछ समय में बढ़ोतरी देखने को मिली है। त्वचा से जुड़े इस रोग के कारण कई लोग इसे संक्रामक यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाला रोग मानकर मरीजों से भेदभाव करते हैं। इसी भेदभाव को दूर करने और रोग के बारे में समाज को जागरूक करने के मकसद से दुनिया भर में नेशनल सोरायसिस फाउंडेशन की ओर से हर वर्ष अगस्त माह को सोरायसिस माह के रूप में मनाया जाता है।
सोरायसिस एक त्वचा से संबंधित रोग है। सोरायसिस में स्किन में एक मोटी परत जम जाती है, जो कि लाल रंग में खुरदरे रूप में उभर कर आती है। सोरायसिस एक ऑटो इम्यून रोग है। यानी इम्यूनिटी का मुख्य कार्य हमारे शरीर को बीमारियों से बचाना होता है। इसके विपरीत कार्य करते हुए जब यही शरीर को बीमार करने लगे, तो ऐसी स्थिति को ऑटो इम्यूनिटी कहा जाता है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय सुल्याली में सेवारत त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. सन्नी जरयाल ने बताया कि जीवन में बढ़ते तनाव और अन्य कारणों इस रोग के मामलों में वृद्धि देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि त्वचा रोग विशेषज्ञों के पास आने वाले 100 रोगियों में करीब तीन रोगी सोरायसिस से ग्रस्त होते हैं। उन्होंने बताया कि इस रोग से ग्रस्त लोगों के बारे में समाज में बहुत सी भ्रांतियां फैल चुकी हैं। सोरायसिस पीड़ितों को समाज में एक बुराई के रूप में देखा जाने लगता है। इसी से निपटने के लिए हर वर्ष अगस्त महीने में सोरायसिस माह मनाया जाता है।
सोरायसिस के लक्षण
- सोरायसिस एक त्वचा से संबंधित रोग है। सोरायसिस में स्किन में एक मोटी परत जम जाती है, जो कि लाल रंग में खुरदरे रूप में उभर कर आती है।
- शरीर के किसी भी हिस्से में यह रोग हो सकता है। कोहनी, पीठ, हाथ-पैरों और नाखून में इसके फैलने की ज्यादा संभावना रहती है।
सोरायसिस के कारण
- अब तक के शोध में सोरायसिस के रोग फैलने का स्पष्ट कारण मालूम नहीं हो सका है। इसके बावजूद इसको बढ़ावा देने वाले कुछ कारण उभरकर सामने आए हैं।
- जीवन में बढ़ा तनाव इसका एक मुख्य कारण उभरकर सामने आया है।
- शरीर में लगने वाली चोटें इसका एक बड़ा कारण रही हैं।
- बीपी और दर्द निवारक दवाइयों और स्टीरॉयड्स लेने वाले लोगों में सोरायसिस का खतरा ज्यादा रहता है।
ऐसे करें बचाव
सोरायसिस कई तरह का हो सकता है। किसी भी तरह का लक्षण नजर आने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। त्वचा की जांच कर डॉक्टर उपचार शुरू कर सकते हैं। यदि त्वचा देखने से रोग की पुष्टि न हो पा रही हो, तो इसे जानने के लिए डॉक्टर बायोप्सी करवा सकते हैं। सोरायसिस लंबे समय तक चलने वाला रोग है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह से उपचार शुरू कर उसे कभी बीच में न छोड़ें।
भ्रांतियां और हकीकत
- सोरायसिस के बारे में मिथक है कि यह एक संक्रामक रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। यह कोई संक्रामक रोग नहीं है। ऐसे में इसे एक सामाजिक बुराई मानकर रोगियों से भेदभाव न करें।
- इसके बारे में मिथक है कि यह गंदगी में रहने वाले लोगों को ही होता है। सच्चाई यह है कि यह किसी भी व्यक्ति को हो सकता है।
- सोरायसिस का खतरा त्वचा तक सीमित है। असल में सोरायसिस के कारण पीड़ित में मोटापा, शुगर और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।
- मिथक है कि यह केवल वयस्कों में होता है। वास्तव में यह किसी भी उम्र में हो सकता है।
- लोगों में भ्रम है कि यह कि इस रोग का इलाज संभव नहीं है। डॉक्टर की सलाह से उपचार शुरू कर इसे काफी हद तक नियंत्रण में करके रोगी एक सम्मानजनक जीवन जी सकता है।