जसूर (कांगड़ा)। स्थानीय उपभोक्ताओं की शिकायत के बाद खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने नूरपुर शहर में उचित मूल्य की दुकानों (डिपो) को आपूर्ति किए गए गेहूं के आटे को वापस मंगवा लिया है। इन दुकानों से आटा खरीदने वाले राशन कार्ड धारकों को इसकी गुणवत्ता बहुत खराब मिली, जो कि खाने लायक नहीं था। उन्होंने इस संबंध में डिपो होल्डर्स से संपर्क किया और उन्हें आटा वापस कर दिया।
वहीं, इस मुद्दे को कांगड़ा जिले के खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, उन्होंने तुरंत कार्रवाई की । इसके बाद स्थानीय कर्मचारियों को प्रयोगशाला परीक्षण के लिए आटे के नमूने लेने का निर्देश दिया गया। पूछताछ से पता चला कि राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम ने नूरपुर सब डिवीजन में एक आटा चक्की को गेहूं पीसने का ठेका दिया था, जबकि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की ओर से मिल को गेहूं आवंटित किया जाता है।
मिल को आटा बदलने के निर्देश
जिला नियंत्रक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले पुरुषोत्तम सिंह के अनुसार नूरपुर कस्बे की कुछ उचित मूल्य की दुकानों को आपूर्ति किए गए गेहूं के आटे को वापस ले लिया गया है और आटा मिल को उठाए गए स्टॉक को गुणवत्तापूर्ण गेहूं के आटे से बदलने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला परीक्षण के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के थोक आउटलेट के आटे के नमूने भी एकत्र किए गए हैं।
उपभोक्ताओं ने की निरंतर जांच की मांग
उचित मूल्य की दुकानों से आटा लेने वाले उपभोक्ताओं का आरोप है कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की ओर से उचित मूल्य खुदरा दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को आपूर्ति किए जा रहे आटे की गुणवत्ता पर कोई कड़ी नजर नहीं रखी जाती है। उन्होंने उचित मूल्य की दुकानों में आपूर्ति किए जा रहे आटे एवं अन्य सामान की नियमित जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।