धर्मशाला। टांडा अस्पताल में निशुल्क मिलने वाली अधिकतर दवाइयां मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। इससे मरीजों को हजारों रुपये खर्च कर निजी दवा स्टोर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, चमड़ी राेग समेत अन्य रोगों की दवाइयां मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। केवल इक्का-दुक्का दवाइयां ही अस्पताल में मिलती हैं, जबकि महंगी दवाइयां मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। इस वजह से भी मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
टांडा में इलाज करवाने आने वाले कई मरीजों ने दावा किया हैं इतनी महंगी दवाइयां खरीद न पाने के कारण उनकी बीमारी बढ़ती जाती है। महंगी दवाइयों के अभाव में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। सबसे ज्यादा दिक्कत गरीब परिवारों को होती है। दवाइयों के दाम सुनने के बाद कुछ मरीज कम डोज लेकर चले जाते हैं तो कई लोग बिना दवाई के घर वापस लौटते हैं। मरीज महंगे इलाज से बच कर सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन सरकारी अस्पतालों में भी महंगी दवाइयां मिलने के मरीज काफी परेशान हैं।
टांडा अस्पताल में अपने इलाज के लिए पहुंचे मरीजों विजय, पंकज, सुुशील और निर्मला ने बताया कि अस्पताल की फार्मेसी में निशुल्क मिलने वाली सभी दवाइयां नहीं मिलती हैं। मरीजों को मजबूरी में निजी स्टोरों से हजारों रुपये खर्च कर दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। सरकारी अस्पतालों में भी बाहर से ही दवाइयां खरीदनी पड़ें तो इससे अच्छा लोग निजी अस्पतालों से ही अपना इलाज करवा लें।
टांडा अस्पताल के एमएस डाॅ. मोहन ने बताया कि सरकार से ईडीएल के तहत 381 दवाइयां अस्पताल में निशुल्क प्रदान की जाती हैं। कुछ समय पहले भी तीन करोड़ की दवाइयां अस्पताल में मंगवाई गई हैं। मरीजों को जो दवाइयां अस्पताल में निशुल्क नहीं मिल पातीं, वे उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।