पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में अध्ययन कर रहे लगभग 1,500 छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। विश्वविद्यालय की जमीन को पर्यटन गांव के लिए देने के सरकार के निर्णय से छात्र, शिक्षक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ काफी परेशान हैं। वे लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि सरकार की यह योजना उनकी पढ़ाई और शोध कार्यों पर गंभीर प्रभाव डाल रही है, जिससे उनका कीमती समय बर्बाद हो रहा है और भविष्य संकट में पड़ गया है। खास बात यह है कि सरकार के इस फैसले का विरोध छात्र स्वयं कर रहे हैं। लिहाजा वे अपनी कक्षाओं से दूर रहकर इसका शिक्षकों और गैर शिक्षकों के साथ विरोध कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि 112 हेक्टेयर भूमि को टूरिज्म विलेज के लिए स्थानांतरित करने का सरकार का निर्णय न केवल विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे उनके अध्ययन और शोध पर भी गहरा असर पड़ रहा है।
छात्र यहां पढ़ाई करने के उद्देश्य से आते हैं, लेकिन सरकार के गलत फैसलों के कारण उन्हें बार-बार सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई और शोध कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि उनका कीमती समय भी बर्बाद हो रहा है। जिसका उनके भविष्य पर भी असर पड़ रहा है। यहां पर प्राकृतिक खेती, अनुसंधान और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियां चल रही हैं। जो छात्रों से जुड़ी हुई है।
- अभय वर्मा, एबीवीपी अध्यक्ष कृषि विवि
प्रदेश सरकार का ध्यान कृषि शिक्षा के बजाय पर्यटन परियोजनाओं पर है। इससे विश्वविद्यालय के शोध कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। जिस भूमि को टूरिज्म विलेज के लिए हस्तांतरित किया जा रहा है। जिनसे छात्रों का भविष्य जुड़ा हुआ है। इस निर्णय से छात्रों के शोध कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है। जो उनके और हिमाचल प्रदेश के कृषि क्षेत्र के विकास के लिए हानिकारक है।
- नितिका ठाकुर, छात्रा एवं एग्रीविजन प्रांत संयोजिका
पर्यटन गांव को देने का हम बार-बार विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार हमारी मांगों को अनदेखा कर रही है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक शैक्षिक संस्थान को राजनीति और पर्यटन परियोजनाओं का शिकार बनाया जा रहा है। जो छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। सरकार छात्रों के भविष्य जुड़ी विवि की जमीन पर्यटन गांव को न दें।
- दिव्यांश पटियाल, स्नातकोतर प्रतिनिधि कृषि विवि