फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kangra News: ज्वालामुखी अस्पताल में न दवाइयां न इंजेक्शन

विज्ञापन
ज्वालामुखी सिविल अस्पताल
विज्ञापन
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। सिविल अस्पताल ज्वालामुखी में सुविधाओं के अभाव का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इस अस्पताल पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 60 पंचायतों की हजारों की आबादी निर्भर करती है। हालात यह हैं कि अस्पताल में जरूरी दवाइयां तक मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं।
विज्ञापन

आपातकालीन स्थिति में रात को इलाज करवाने के लिए पहुंचने वाले मरीजों को यहां गैस तक का इंजेक्शन भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जबकि प्रदेश सरकार मरीजों को मुफ्त में दवाइयां देने के दावे करती है। विश्वविख्यात शक्तिपीठ मंदिर होने के नाते यहां पर बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालु भी इस अस्पताल में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं लेकिन देर रात को यहां न तो दवाइयां मिलती हैं और न ही इंजेक्शन। यहां तक कि कैनुला तक भी मरीजों को बाहरी दुकानों से खरीद कर लाना पड़ता है।
मरीजों की दिक्कत यही खत्म नहीं होती, अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन भी पिछले कई माह से खराब पड़ी है। इसके चलते सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है। उन्हें मजबूरन निजी संस्थानों से महंगे टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं, जबकि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा निशुल्क है। सूत्रों के मुताबिक ज्वालामुखी अस्पताल के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन ज्वालामुखी ट्रस्ट के सौजन्य से मिलने का प्रस्ताव रखा गया था लेक़िन वह भी अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाया है।
विज्ञापन


रविवार रात्रि अस्पताल पहुंचे एक मरीज के तीमारदार ने बताया कि उनकी माता बीमार थीं जिस कारण वह उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे। इस दौरान डॉक्टर ने एक गैस का इंजेक्शन लिखा लेकिन अस्पताल में वह नहीं मिला। अस्पताल परिसर में मौजूद सरकारी दवाइयों की दुकान में भी यह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था। वहीं दूसरी ओर नेशनल हाईवे 88 में दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोग भी इस अस्पताल पर ही निर्भर करते हैं। ऐसे में नाममात्र दवाइयां भी उपलब्ध नहीं होने पर लोगों को कैसे बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाएंगी।

सीएमओ कांगड़ा डॉक्टर सुशील शर्मा से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि मरीजों को दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध होती हैं।
ज्वालामुखी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी सतेंद्र वर्मा ने बताया कि कुछ एसीलोक, रेंटाडीन इंजेक्शन उपलब्ध हैं। लेकिन अच्छी किस्म जैसे पैंटाजोल कैप्सूल उपलब्ध नहीं रहते हैं। अगर अन्य कोई दवाई या इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है तो जल्द संज्ञान लिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें