लंबागांव (कांगड़ा)। क्षेत्र की कामाख्या माता मंदिर में चल रही शिव पुराण कथा के चौथे दिन कथावाचक संजय शर्मा ने भगवान शिव के तीन रूपों और बेलपत्र के महत्व के बारे में बताया। श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव के मुख्य तीन रूप हैं, जो सृष्टि, स्थिति व संहार के कारक हैं। ये तीनों रूप शिव के ही तीन पहलू हैं, जो सृष्टि के चक्र को संचालित करते हैं। ब्रह्मा (सृष्टि) शिव ने ब्रह्म को सृष्टि की रचना का कार्य सौंपा। विष्णु (स्थिति) शिव ने बिष्णु को सृष्टि के पालन का कार्य सौंपा। रुद्र (संहार) शिव ने रुद्र को सृष्टि के विनाश का कार्य सौंपा। ये तीनों ही रूप एक ही परमेश्वर अर्थात शिव के ही हैं, जो सृष्टि के चक्र को चलाते हैं। बेलपत्र पर उन्होंने कहा कि खंडित या टूटे बेलपत्र को शिव पर नहीं चढ़ाना चाहिए। बेलपत्र को शिव पर चढ़ाते समय उसका चिकना भाग शिवलिंग की तरफ होना चाहिए। बेलपत्र चढ़ाने से मोक्ष प्राप्ति होती है, जो व्यक्ति बेलपत्र से शिव की पूजा करता है वह शिवलोक को प्राप्त होता है।