धर्मशाला। गर्मी का मौसम शुरू होते ही पर्यटन नगरी धर्मशाला-मैक्लोडगंज में सैलानी बढ़ने लगे हैं लेकिन सैलानियों को यहां शौचालयों की सुविधा न मिल पाने के कारण उन्हें परेशानी हो रही है। इससे स्वच्छ भारत मिशन धर्मशाला में फेल होता नजर आ रहा है। प्रदेश की पहली स्मार्ट सिटी और पर्यटन नगरी का तमगा हासिल करने वाली धर्मशाला में सार्वजनिक शौचालयों की दरकार है। आलम यह है कि आम लोगों सहित पर्यटकों को भी मजबूरन खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, लोगों की सुविधा के लिए जो शौचालय बनाए गए थे, उन्हें या तो उखाड़ दिया गया है या उनकी हालत दयनीय है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालयों पर ताला लटका पड़ा हुआ है। जिला मुख्यालय धर्मशाला के कचहरी चौक पर दो सार्वजनिक शौचालय थे, जिन्हें वहां से हटा दिया गया है। शौचालय को स्मार्ट चौक की जद में आने के कारण तोड़ दिया गया है, लेकिन इससे पहले कहीं और शौचालय की व्यवस्था स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने नहीं की है। इसके अलावा कचहरी में ही एक और शौचालय था, जिसे भी तोड़ दिया गया है। मौजूदा समय में कचहरी चौक, मैक्लोडगंज, भागसूनाग सहित अन्य प्रमुख स्थलों में शौचालय नहीं है।
वहीं, बस अड्डा धर्मशाला के बाहर गांधी वाटिका के पास ई-टॉयलेट भी कबाड़ बने हैं जबकि कोतवाली, स्कूल शिक्षा बोर्ड कार्यालय, धर्मशाला कॉलेज, केंद्रीय विवि, एचपीसीए स्टेडियम और अन्य स्थालों पर भी शौचालयों की दरकार है। हर वर्ष नगर निगम धर्मशाला के वार्षिक बजट में करोड़ों के विकास कार्यों का प्रावधान किया जाता है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या शौचालयों को दरकिनार किया जा रहा है। नगर निगम धर्मशाला को बने साढ़े सात साल तो स्मार्ट सिटी को बने भी छह साल से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन आज दिन तक धर्मशाला में एक भी नया शौचालय नहीं बनाया गया है। शहर में करोड़ों की लागत से ई-शौचालय स्थापित किए जाने थे, लेकिन आज दिन तक योजना केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई है।
नगर निगम धर्मशाला की मेयर नीनू शर्मा ने बताया कि शहर में शौचालयों का रखरखाव किया जाएगा। साथ ही जिन शौचालयों पर ताले लगे हैं, उन्हें खुलवा दिया जाएगा। रही बात ई-शौचालयों की तो कुछ समय पहले ठेकेदार का टेंडर रद्द कर दिया गया था।