रक्कड़ (कांगड़ा)। चैत्र नवरात्र के समापन पर प्रसिद्ध तीर्थस्थल कालीनाथ कालेश्वर महादेव में प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ ब्यास नदी तट पर विधिवत पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं ने मंदिर में कन्याओं को फल आदि बांट उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद भगवान शिव मंदिर में माथा टेका और पंचतीर्थी में स्नान किया। हरी-भरी जौं और पूजा सामग्री को जल में प्रवाहित कर कालीनाथ कालेश्वर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस मौके में पुलिस और प्रशासन की तरफ से यहां कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं रहा। लोगों को ब्यास नदी में ब्लैक स्पॉट में स्नान करते समय अनहोनी घटना घटित होने का खतरा सताता रहा। वहीं, सैकड़ों वाहनों की आवाजाही के कारण यहां घंटों तक लोग जाम में फंसे रहे। इस विषय पर डीएसपी ज्वालामुखी आरपी जसवाल ने बताया कि इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। हमारा कार्य बैसाखी मेले तक ही सीमित था।
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि के दिन चैत्र नवरात्र का समापन होता है। इस दिन कन्या पूजन करने का विशेष महत्व माना गया है। कन्या पूजन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है। नवरात्रि की शुरुआत में पहले दिन जौ बोए जाते हैं और कलश स्थापना की जाती है। नवरात्र में पूरे नौ दिनों तक पूजा-पाठ किए जाते हैं और व्रत रखा जाता है। हरी-भरी जौ को लोग नदी या बहते जल में प्रवाहित कर देते हैं।