पालमपुर (कांगड़ा)। पालमपुर और आसपास इलाके में न्यूगल खड्ड में फेंके जा रहे कूड़े को लेकर पालमपुर वेलफेयर एंड एन्वायर्नमेंट प्रोटेक्शन फोरम ने चिंता जाहिर की है। इसे लेकर फोरम सदस्यों ने नगर निगम के संयुक्त आयुक्त के साथ मिलकर उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा।
फोरम के सदस्यों का कहना है कि न्यूगल खड्ड को साफ करने के लिए फोरम ने एसडीएम पालमपुर के नेतृत्व में 5 फरवरी 2022 को एक सफाई अभियान भी चलाया था। जिसमें नगर निगम, कई संस्थाओं और स्कूली बच्चों ने भाग लिया था। इस दौरान न्यूगल खड्ड से कई क्विंटल कूड़ा कचरा निकाला था। बावजूद इसके न्यूगल में आए दिन कूड़ा-कचरा फेंका जा रहा है।
इसका सबसे बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि नगर निगम में अभी भी कूड़े कचरे का सही निष्पादन नहीं हो रहा है। इससे लोग न्यूगल खड्ड में कूड़े कचरे को फेंक रहे हैं। फोरम के अध्यक्ष अजीत बाघला और अन्य सदस्यों ने संयुक्त आयुक्त से मुद्दा उठाया कि न्यूगल में कूड़ा कचरा फेंका जा रहा है। इससे पानी जहरीला हो सकता है जो आने वाले दिनों में लोगों के सेहत के लिए ठीक न हो। जबकि न्यूगल से बंदला से लेकर आलमपुर तक पालमपुर, सलुह और जयसिंहपुर विस क्षेत्रों के कई हजार लोगों को पीने का पानी जाता है, लेकिन इस पर जल्द रोक नहीं लगाई गई तो न्यूगल का पानी पीने योग्य नहीं रह जाएगा।
उन्होंने कहा कि न्यूगल में सफाई अभियान में नगर निगम के भाग लेने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हालांकि फोरम ने उपरोक्त कार्यशाला की कई सिफारिशों को लागू किया है और वर्तमान में पालमपुर और उसके आसपास के सरकारी स्कूलों में एक जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा रहा है। यही नहीं फोरम ने कूड़ा कंचरा संयंत्र का दौरा भी किया, जहां तरल और ठोस कचरे की मात्रा और विविधता खतरनाक अनुपात तक पहुंच गई है और यह प्राकृतिक पर्यावरण के साथ-साथ मानव और पशु स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इसका सारा रिसाव न्यूगल खड्ड के पानी में हो रहा है। फोरम ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और फोरम इसमें अपना सहयोग करेगी।
पालमपुर में कूड़े कचरे को लेकर जल्द बनेगी विस्तृत योजना : संयुक्त आयुक्त
पालमपुर नगर निगम के संयुक्त आयुक्त शिव मोहन सैनी ने कहा कि कचरा
प्रबंधन के लिए हिमाचल सरकार से बजट की मंजूरी आ गई है। जल्द ही वेस्ट
मैनेजमेंट को लेकर पालमपुर में एक विस्तृत योजना बनाकर कार्य किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश में चुनाव में लगी आचार संहिता के कारण परियोजना
कार्यान्वित होने में विलंब हुआ था ।