नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर नूरपुर रोड से बैजनाथ तक बंद पड़ी रेलगाड़ियों की बहाली में हो रही देरी से कांगड़ा घाटी के लोगों में रेलवे बोर्ड के प्रति रोष बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों ने कहा है कि नूरपुर रोड से बैजनाथ तक चलने वाली दोनों रेलगाड़ियों की आवाजाही शीघ्र बहाल नही हुई तो अक्तूबर से रेलवे के खिलाफ वे धरना- प्रदर्शन शुरू करेंगे। हालांकि रेलवे बोर्ड ने शनिवार को कांगड़ा से बैजनाथ तक रेलमार्ग का सफल ट्रायल कर लिया है, लेकिन कांगड़ा से नूरपुर रोड तक रेलमार्ग बहाल नहीं होने से लोग परेशान हैं। कांगड़ा से जवाली तक करीब एक दर्जन रेलवे स्टेशन पड़ते हैं और इन स्टेशनों के बीच 100 से भी ज्यादा गांवों की जनता के लिए एक मात्र रेलमार्ग ही आवाजाही का मार्ग है। रेलगाड़ी बंद होने से इन गांवों के लोगों को आठ से 12 किमी सफर पैदल तय कर बस लेनी पड़ी रही है। इससे उन्हें चार गुना किराया देना पड़ रहा है।
उधर, रेलवे सूत्रों से पता चला है कि ज्वालामुखी रोड के पास फोरलेन भूस्खलन से धंसने के कारण करीब 100 मीटर रेलमार्ग मलबे में दब गया है, हालांकि एनएच ठेकेदार ने मलबा हटा दिया है और अब रेललाइन की मरम्मत बाकी रह गई है। 100 मीटर मार्ग पर नई पटरी बिछाने के बाद ही रेलगाड़ियों की बहाली हो पाएगी। लोगों ने राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी और लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज से मांग की है कि पठानकोट-नूरपुर रोड के बीच जब तक चक्की खड्ड रेलवे पुल बनकर तैयार नहीं होता तब तक नूरपुर रोड से बैजनाथ तक रेलगाड़ियों की आवाजाही इसी माह अंत तक बहाल की जाए।
सांसद इंदु गोस्वामी ने कहा कि पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर रेल बहाली और चक्की खड्ड पुल निर्माण में तेजी लाने के मुद्दे को राज्यसभा में उठाया था और रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने मार्च तक रेलगाड़ियां बहाल करने का आश्वासन दिया है।
उत्तर रेलवे मंडल फिरोजपुर के डीआरएम संजय साहू ने बताया कि चक्की खड्ड पुल का निर्माण तेजगति पर चला हुआ है और मार्च तक निर्माण पूरा होने का लक्ष्य है। मार्च के बाद पठानकोट से जोगिन्दरनगर तक सभी सात रेलगाड़ियों की आवाजाही बहाल कर दी जाएगी। ज्वालामुखी रोड के पास रेलमार्ग से मलबा हटा दिया है और रेल पटरी की मरम्मत के बाद शीघ्र रेलगाड़ियां बहाल कर दी जाएंगी।
क्या कहते है लोग
पिछले साल 2023 अगस्त में भी ज्वालामुखी रोड से आगे 300 मीटर रेलमार्ग भूस्खलन से हवा में लटक गया था और इस रेलमार्ग की मरम्मत में रेलवे बोर्ड के सुस्त रवैये ने दस महीने लगा दिए तो अब 100 मीटर रेलमार्ग की मरम्मत में कितने दिन लगेंगे अंदाजा लगाया जा सकता है।
अश्विनी गुलेरिया, ग्रामीण, नगरोटा सूरियां
कांगड़ा से जवाली के बीच रेलमार्ग ही ग्रामीणों के लिए आने जाने का साधन है, लेकिन रेलवे बोर्ड कांगड़ा से बैजनाथ तक रेलगाड़ियों की बहाली कर रहा है जबकि यहां बसों की बेहतर सुविधा है। बोर्ड को चाहिए कि कांगड़ा से नूरपुर रोड तक रेलगाड़ियां चलाने को प्राथमिकता दे।
दशनेश तलवार, ग्रामीण कथोली
नूरपुर रोड से बैजनाथ तक चलने वाली दोनों रेलगाड़ियों की आवाजाही शीघ्र बहाल नही हुई तो अक्तूबर महीने से रेलवे बोर्ड के खिलाफ धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।
राजेश नंदपुरी, व्यापारी नगरोटा सूरियां
पिछले 10 साल से पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग की बरसात के बाद लाखों रुपये मरम्मत पर रेलवे बोर्ड खर्च कर चुका है, लेकिन हर बरसात में उसी पुरानी जगह पर भूस्खलन से रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो जाता है, जो कि चिंता का विषय है। रेलमंत्री को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
सतपाल मेहरा, दुकानदार नगरोटा सूरियां