धर्मशाला। स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला के सभागार में अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस के उपलक्ष्य में जिला स्तरीय गतिविधि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने की। उन्होंने बताया कि यह दिवस हमें सांप के डसने के खतरों के बारे में ही नहीं, बल्कि सापों के बारे में भी अपनी गलत धारणाओं और मिथकों को दूर करने के लिए आमंत्रित करता है। अगर किसी को सांप डस ले तो किसी वैध के पास जाने के बजाय पीड़ित को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं। सांप का डसना एक वैश्विक स्वास्थ्य चिंता का विषय है, जो मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में ग्रामीण समुदायों को प्रभावित करता है, जहां जहरीले सांप प्रचलित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को स्थानीय सांपों की प्रजातियों, उनकी आदतों और आवासों के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए। विषैले सांप के डसने से चिकित्सा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जो घातक हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि भारत में हर साल लगभग 3 से 4 मिलियन सर्पदंश से लगभग 50,000 मौतें होती हैं, जो वैश्विक सर्पदंश से संबंधित मौतों का लगभग आधा हिस्सा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुमित शर्मा ने बताया कि सांप के डसने के लक्षणों में मुख्य रूप से अंग की लगातार दर्दनाक सूजन, न्यूरोपैरालिटिक लक्षण जैसे पलकों का झुकना, दोहरी दृष्टि, बोलने में कठिनाई, आवाज में कर्कशता, सांस लेने में कठिनाई और निगलने में कठिनाई होती है। अगर सांप डस ले तो रोगी को शांत रखें। घाव वाले क्षेत्र (काटने के निशान) को खुला छोड़ दें।