पंचायत प्रतिनिधि बोले, डर से समय पर पंचायत चुनाव नहीं करवा रही सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बरियाल (कांगड़ा)। पूर्व में लाहौल-स्पीति जिला में पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने की तर्ज पर स्कूलों के प्रधानाचार्यों को पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने के विचार की खबर पर पंचायत प्रधानों व पूर्व प्रतिनिधियों में सरकार के प्रति रोष है। पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है और इसके बाद पंचायतों में विकास कार्यों और अन्य योजनाओं पर असर न पड़े इसलिए सरकार वैकल्पिक तौर पर प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी में जुट गई है। नगरोटा सूरियां की पंचायत कथोली के प्रधान जीएस वेदी ने कहा कि सरकार ने यदि इस तरह का कोई फैसला लिया तो चुने हुए पंचायत प्रतिनिधि इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य स्कूल की प्रशासनिक व्यवस्था में ही पूरी तरह व्यस्त रहते हैं तो ऐसे में वह पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था को कैसे संभालेंगे। नगरोटा सूरियां पंचायत के पूर्व प्रधान संजय महाजन ने कहा कि सरकार जनता में अपनी लोकप्रियता पूरी तरह खो चुकी है और इसी डर से समय पर पंचायतों का चुनाव नहीं करवा पाई है। सरकार 31 जनवरी के बाद अपने लोगों को पंचायतों में प्रशासक लगाकर 31 मार्च तक विकास कार्यों के लिए पड़े करोड़ों रुपये को वापस मंगवा कर अपनी चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए दूसरी मदों में खर्च करने की मंशा बनाए हुए है। नगरोटा सूरियां पंचायत समिति उपाध्यक्ष धीरज अत्री ने कहा कि बच्चों की घटती संख्या के कारण सरकार स्कूलों को बंद करती जा रही है और बच्चों की संख्या बनाए रखने का मानसिक दबाव पहले ही प्रधानाचार्य झेल रहे हैं। ऐसे में पंचायतों में प्रशासक नियुक्त कर उन पर और बोझ डाल कर सरकार की मंशा जगजाहिर हो रही है कि सरकार समय पर पंचायत चुनाव करवाने में असफल रही है।