धर्मशाला। प्रदेश सरकार की ओर से जिला कांगड़ा को पर्यटन राजधानी के तौर पर विकसित करने के लिए बड़े दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन यहां पर पर्यटन योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पर्यटन विभाग के पास जिला कांगड़ा के बिना पंजीकरण चल रहे होटलों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। संबंधित विभाग की ओर से जिले में लोगों की शिकायत आने पर ही इन होटल मालिकों पर शिकंजा कसा जाता है। विभाग की परेशानियां यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि पूरे जिला के होटलों और रेस्तरां की जांच-पड़ताल के लिए विभाग के पास मात्र एक ही निरीक्षक उपलब्ध है।
हालांकि पर्यटन नगरी धर्मशाला और मैक्लोडगंज के अवैध होटल निर्माण के बारे में विभाग ने नगर निगम धर्मशाला से अवैध होटल निर्माण के संदर्भ में जानकारी मांगी गई है, जिससे की यहां अंपजीकृत रूप से चल रहे होटलों के बारे में जानकारी मिल सके। जिला कांगड़ा में मौजूदा समय में 672 पंजीकृत होटल और 267 होमस्टे चल रहे हैं, लेकिन फिर भी बहुत से ऐसे होटल, रेस्तरां और होमस्टे हैं, जिनका विभाग के पास रिकॉर्ड नहीं है। मात्र लोगों की शिकायतों के दौरान ही विभाग उन तक पहुंच पाता है। ऐसे में बिना पंजीकरण चल रहे होटल, रेस्तरां और होमस्टे से विभाग को राजस्व के रूप में चूना लग रहा है।
विभाग की ओर से लोगों की शिकायत पर ही अपंजीकृत होटलों तक पहुंचा जाता है। धर्मशाला और मैक्लोडगंज और धर्मशाला में अपंजीकृत होटलों की जानकारी को लेकर नगर निगम धर्मशाला से अवैध होटल निर्माण का डाटा मांगा गया है, ताकि इन होटलों पर कार्रवाई की जा सके।
- विनय धीमान, उपनिदेशक, पर्यटन विभाग जिला कांगड़ा