कांगड़ा। कांगड़ा शहर के प्रसिद्ध गुप्त गंगा धाम स्थित ऐतिहासिक तालाब का पानी पूरी तरह सूख गया है। इस कारण उसमें मौजूद मछलियों को मछली फार्म कांगड़ा और बनेर खड्ड में सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा। तालाब के सूखने की वजह विशेषज्ञ क्षेत्र में बढ़ते हैंडपंप और बोरवेल को मान रहे हैं, जो भूमिगत जल स्तर को तेजी से खत्म कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस तालाब और धाम का निर्माण पांडवों के काल में हुआ था और यह शक्तिपीठ श्री बज्रेश्वरी देवी मंदिर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थान है। हजारों श्रद्धालु मंदिर जाने से पहले गुप्त गंगा में स्नान कर अपनी यात्रा आरंभ करते हैं। परंतु अब पानी की अनुपस्थिति के चलते श्रद्धालुओं को मायूसी का सामना करना पड़ रहा है। गुप्त गंगा धाम के प्रबंधक टीआर गुलेरिया के अनुसार तालाब मार्च से सूखना शुरू हो जाता है और अप्रैल तक पूरी तरह खाली हो जाता है। बरसात के मौसम में ही पानी दोबारा भरता है लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। साथ ही, धाम के पास स्थित झरना भी पूरी तरह से सूख चुका है जो कभी इस क्षेत्र की जलसंपदा का प्रतीक था।