राजा का तालाब (कांगड़ा)। क्षेत्र के रैहन स्थित पैलेस में संत शिरोमणि पुनीत गिरि के सानिध्य में चल रही सात दिवसीय शिव महापुराण प्रवचन कथा के चौथे दिन मां गंगा का अवतरण प्रसंग सुनाया गया। पुनीत ने कहा कि कलियुग में लोगों का उद्धार करने के लिए गंगा का अवतरण हुआ है। मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण भगीरथ की तपस्या के कारण हुआ था। राजा सागर के 60,000 पुत्रों को मुक्त कराने के लिए भगीरथ ने कठोर तपस्या की और भगवान शिव को प्रसन्न किया। इससे गंगा मां नदी के रूप में बहकर जनमानस को पवित्र कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए गंगा को धरती पर लाने के लिए कठोर तपस्या की। गंगा के प्रचंड वेग को धरती पर संभालने के लिए शिवजी ने उसे अपनी जटाओं में धारण किया। शिवजी ने गंगा को धीरे-धीरे धरती पर उतारा, जिससे गंगा नदी का जन्म हुआ। गंगा को शिवजी की जटाओं से अवतरित होने के कारण उसे पवित्र माना जाता है। गंगा के जल से पापों का नाश होता है और यह मुक्ति का प्रतीक है। गंगा की कथाएं हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। इस मौके पर पंकज दर्शी, दुर्गेश कटोच, विजय सेकड़ी सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।