धर्मशाला। प्रदेश की महत्वकांक्षी गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण परियोजना की जद में आने वाले क्षेत्र में सरकारी भूमि पर बसे लोगों के राहत एवं पुनर्वास की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। लंबे समय से सरकारी भूमि पर बसे इन लोगाें को विस्थापन के दौरान सरकार किस प्रकार राहत प्रदान करेगी, इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जिला प्रशासन की ओर से निजी भूमि पर बने भवनों और व्यवसायिक संस्थानाें की रिपोर्ट तो तैयार कर ली है, लेकिन सरकारी भूमि पर कितने भवन हैं, इसकी रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है। जिला प्रशासन भी सरकार से इस बारे अधिसूचना जारी होने का इतंजार किया जा रहा है।
गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण की जद में कांगड़ा और शाहपुर उपमंडलों के 14 गांव आ रहे हैं। इसमें कांगड़ा के 10 जबकि शाहपुर उपमंडल के चार गांव शामिल हैं। एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए 147.7587 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी। इसमें से 25.1064 हेक्टेयर सरकारी भूमि, जबकि 122.6623 हेक्टेयर निजी भूमि है। सरकारी भूमि चिह्नित किए गए भवनों के मालिकों को नोटिस जारी कर उनके दावे और आक्षेपों को सुनने के लिए तिथियां निर्धारित कर दी गई हैं। नोटिस देने का कार्य भी लगभग 90 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। वहीं, दूसरी ओर हवाई अड्डा विस्तारीकरण की जद में आने वाली सरकारी भूमि पर कितने मकान और व्यवसायिक परिसर स्थित हैं, इसका सर्वे नहीं हुआ है। सरकारी भूमि पर बसे प्रभावितों को भी सरकार से आस है कि उनके पुनर्वास के लिए भी सरकार उचित कदम उठाएगी। प्रभावित क्षेत्रों में नोटिस को लेकर चर्चाएं इन दिनों जोरों पर हैं।
एयरपोर्ट विस्तारीकरण की जद में आने वाली सरकारी जमीन पर स्थित भवनों और कामर्शियल परिसर का अभी सर्वे नहीं हुआ है। सरकार की ओर से इस बारे अधिसूचना जारी होनी है। सरकार से अधिसूचना जारी होने के बाद इसका सर्वे भी पूरा कर लिया जाएगा।
ईशांत जसवाल, एसडीएम कांगड़ा