पालमपुर (कांगड़ा)। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने प्रदेश में निर्मित 62 दवाओं के गुणवत्ता मानकों में फेल होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बद्दी, नालागढ़, पांवटा साहिब और कालाअंब जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित दवा उद्योगों से हजारों लोगों को रोजगार मिला है और भारी मात्रा में निर्यात होता है। भारत विशेषकर जेनेरिक दवाओं में विश्वभर में अग्रणी है जिसमें हिमाचल की बड़ी हिस्सेदारी है। शांता कुमार ने कहा कि एक ओर प्रदेश में ड्रग पार्क बन रहा है, वहीं दूसरी ओर घटिया दवाओं के बार-बार आ रहे मामले इस उद्योग को तबाह कर देंगे। देशभर में फेल हुई 220 दवाओं में से 62 हिमाचल में बनना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह पूरे प्रदेश के माथे पर कलंक है, सरकार बताए कि यह कलंक कब धुलेगा। संवाद