परागपुर (कांगड़ा)। गरली-परागपुर क्षेत्र में विकास की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं, क्योंकि स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) 22 साल बाद भी विकास योजना नहीं बना पाई है। यह योजना नगर एवं ग्राम योजना विभाग के माध्यम से बनाई जानी थी, लेकिन अब तक इसका कोई प्रगति नहीं हुई है। इस कारण क्षेत्र की पंचायतों में टीसीपी एक्ट के उद्देश्य पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
टीसीपी एक्ट का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के विकास को नियंत्रित करना और सुनिश्चित करना था कि विकास की योजनाएं स्थानीय समुदाय के हितों के अनुसार बनाई जाएं, लेकिन साडा की विफलता के कारण, यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा, बिना योजना के बेतरतीब भवन निर्माण होने से क्रंकीट के भवन बन जाने से धरोहर रूपी भवनों का संरक्षण भी नहीं हो रहा है। जबकि टीसीपी एक्ट लागू करने के पीछे सरकार का कहना था कि आगामी भवन निर्माण धरोहर के अनुरुप होगा। क्षेत्र के निवासियों राहुल, संजीव, राजीव, दीपक, रिशु, अखिलेश, अनूप, अजय, सुनील, राकेश, नवीन, राजेश, रजत और निखिल आदि ने कहा कि उन्हें निराशा है और वे साडा से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 22 साल का समय पर्याप्त है और अब विकास योजना बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। इस मुद्दे पर साडा और नगर एवं ग्राम योजना विभाग को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और विकास योजना बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि परागपुर और गरली के लोगों के अनुसार विकास की योजनाएं मिलनी चाहिए और साडा को अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना चाहिए।
-साडा गरली-परागपुर की विकास योजना नगर एवं ग्राम योजना विभाग को तैयार करनी है और उसे इस बारे में लिखा भी गया है।
-शिल्पी बेक्टा, अध्यक्ष, साडा, गरली-परागपुर एंव एसडीएम देहरा