पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रवीण शर्मा ने कहा कि लाभ देने में प्रदेश सरकार कर्मचारियों के साथ दोहरे मापदंड अपनाकर असमानता को बढ़ावा दे रही है। 2002 में जो कमीशन के तहत टीजीटी शिक्षकों की परीक्षा हुई थी। उन भर्तियों पर उस समय की सरकार ने रोक लगा दी थी। तथ्य यह थे कि इस परीक्षा में धांधली हुई थी। जब चयनित टीजीटी कोर्ट में गए तो उन्हें लगभग 10 साल बाद हाई कोर्ट से न्याय मिला और 2009-10 में उन्हें नियुक्ति पत्र अनुबंध आधार पर दिए। दोबारा ये शिक्षक कोर्ट में गए और फिर कोर्ट ने आदेश दिए कि इन्हें कमीशन की तिथि से नियमित किया जाए। इन्हें मई 2003 से नियमितीकरण के सभी लाभ सरकार ने दे दिए, बल्कि अर्जित अवकाश भी मिले, जबकि इनकी इतने सालों की हाजिरी का कोई भी रिकाॅर्ड नहीं हैं, क्यों उस समय इन्हें कार्यरत नहीं किया था। उन्होंने कहा कि जब इनको अर्जित अवकाश और सभी वित्तीय लाभ दे दिए तो 2008 में जो ओल्ड आर एंड रुल्ज के तहत लगे थे उन्हें लाभों से वंचित क्यों किया जा रहा है, जबकि उन्हें भी हाई कोर्ट ने नियुक्ति तिथि से नियमित किया है।