धर्मशाला। रात के समय जिला मुख्यालय स्थित क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला की सुरक्षा मात्र चार सिक्योरिटी गार्ड और एक सुपरवाइजर के सहारे रहती है। यह व्यवस्था 300 बिस्तर वाले अस्पताल पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। अस्पताल में पहले भी कई बार चोरियां हो चुकी हैं। धर्मशाला अस्पताल में प्रदेश करने से चार से अधिक द्वार हैं, लेकिन केवल चार सुरक्षा कर्मचारियों के हाथों सुरक्षा जिम्मा छोड़ना उचित नहीं हैं। इसके अलावा कई बार बिना जांच के लोगों को वार्डों में घुसते हुए देखा गया है। इससे हालात यह बने हैं कि कोई भी व्यक्ति कोई हथियार लेकर अस्पताल परिसर में घुस सकता है।
एक तरफ कोलकाता में महिला प्रशिक्षु डाॅक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या करने के बाद देशभर के चिकित्सक न्याय की मांग पर हड़ताल पर बैठे हैं, जिसका खामियाजा मरीजों को झेलना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर अस्पतालों में सुरक्षा को बढ़ाया नहीं जा रहा है। इसमें डाॅक्टरों, स्टाफ नर्स और अन्य स्टाफ की सुरक्षा में चूक नजर आ रही है। कायदे से 300 बिस्तर वाले अस्पताल में 30 से अधिक सुरक्षा कर्मचारी होने चाहिए। दिन के समय तो अस्पताल में 10 से 12 सुरक्षा कर्मचारी तैनात रहने हैं, लेकिन रात से समय सुरक्षा की अधिक जरूरत रहती है तो वह केवल चार सुरक्षा कर्मचारियों पर सारा जिम्मा छोड़ दिया जाता है।
27 की जगह 23 कर्मचारी
धर्मशाला अस्पताल में ठेकेदार की ओर से सुरक्षा कर्मचारियों के 27 पदों के लिए टेंडर भरा गया था, लेकिन धरातल पर केवल 23 भी कर्मचारी शामिल हैं, जिसमें 20 सुरक्षा कर्मचारी और तीन सुपरवाइजर मौजूद हैं। ऐसे में ठेकेदार के खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई नहीं की जा रही है। धर्मशाला अस्पताल में कुछ माह पहले भी चोरियां हो चुकी हैं।
कुछ स्थानों पर ही सीसीटीवी कैमरे
अस्पताल परिसर में केवल कुछेक स्थानों पर ही सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इतने बड़े परिसर में सिर्फ 12 सीसीटीवी कैमरे हैं। ऐसे में कोलकाता वाली घटना यहां न हो, इसके लिए सरकार और अस्पताल प्रशासन को सुरक्षा पहरा और सीसीटीवी कैमरे बढ़ाने होंगे। इससे रात के समय स्टाफ को सुरक्षित महसूस हो सके।
क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में रात के समय मरीज और स्टाफ कम ही होता है। इसलिए सुरक्षा कर्मचारी भी कम होते हैं। आपातकालीन वार्ड में रात के दो सुरक्षा कर्मचारी तैनात रहते हैं। सरकार के निर्देशों के अनुसार अस्पताल में कुल 23 सुरक्षा कर्मचारी हैं, जो अलग-अगल समय में ड्यूटी देते हैं।
- डॉ. अजय दत्ता, एमएस, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला
पुरुष और महिला डॉक्टर के लिए एक ही चेजिंग रूम
धर्मशाला अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों के लिए अलग-अलग चेंजिंग रूम की व्यवस्था है। हालांकि पुरुष डॉक्टर और महिला डॉक्टर के लिए एक ही चेंजिंग रूम है।
नूरपुर अस्पताल की रात को तीन सुरक्षा कर्मी के सहारे
सिविल अस्पताल नूरपुर में कुल 13 सुरक्षा कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन रात के समय 200 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में केवल तीन सिक्योरिटी गार्ड की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। इससे आईपीडी में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्सों और इमरजेंसी में सेवाएं देने वाले चिकित्सक भी तीन सुरक्षा कर्मियों के भरोसे हैं।