कांगड़ा के वीरभद्र मंदिर परिसर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की श्री हरि कथा में उपस्थित सं
धर्मशाला। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से बाबा वीरभद्र मंदिर कांगड़ा में चल रही तीन दिवसीय श्री हरि कथा का रविवार को समापन हो गया। साध्वी विष्णु अर्चना ने कहा कि भक्त को अवगुणों का परित्याग करना चाहिए। केवल गुरु के बताए मार्ग का ही अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने भक्त नरसी मेहता के जीवन प्रसंगों का गूढ़ एवं रहस्यमयी आध्यात्मिक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नरसी मेहता केवल एक भक्त नहीं बल्कि भक्ति के उस उच्चतम स्वरूप के प्रतीक थे जहां साधक स्वयं को पूर्णतः ईश्वर में विलीन कर देता है। जब साधक अहंकार, मोह और सांसारिक आकर्षणों का त्याग करता है तभी उसके भीतर सच्ची भक्ति का उदय होता है। जब उन्होंने समाज की मान-प्रतिष्ठा, आलोचना और तिरस्कार को त्याग कर केवल प्रभु को सर्वस्व मान लिया तब उनके जीवन में दिव्य चमत्कार प्रकट होने लगे। समापन अवसर पर भंडारे का आयोजन हुआ। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। संवाद