कांगड़ा। विश्वविख्यात शक्तिपीठ माता बज्रेश्वरी देवी की पिंडी पर 21.50 क्विंटल मक्खन से शृंगार किया गया है। रातभर माता की पिंडी पर मक्खन चढ़ाने की प्रक्रिया जारी रही और वीरवार तड़के पिंडी पर मक्खन चढ़ाने के बाद मेवों और फलों से शृंगार किया गया। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसे घृत मंडल का नाम दिया गया है। सदियों से दैवीय प्रथा का अनुसरण करते हुए मां बज्रेश्वरी देवी के पुजारी मंदिर में घृत पर्व मनाते हैं। यह पर्व सात दिन तक जारी रहता है। इस दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु मां की मक्खन से सजी पिंडी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सातवें दिन यह मक्खन माता की पिंडी से उतारा जाता है और यहीं से इस प्रसाद की मान्यता अपनी अलग पहचान बना लेती है। मान्यता है कि इस प्रसाद को खाया नहीं जाता अपितु चर्म रोगों के लिए यह प्रसाद रामबाण का काम करता है। मंदिर अधिकारी शिवाली ठाकुर ने बताया कि सात दिन तक श्रद्धालुओं की सुविधा के इंतजाम मंदिर प्रशासन ने किए हैं। संवाद