फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शक्ति एप या गुडिया हेल्प लाइन का पता होता तो शायद नहीं होती वारदात

विज्ञापन
विज्ञापन
शक्ति एप या गुड़िया हेल्प लाइन की जानकारी होती तो शायद नहीं होती वारदात
विज्ञापन

जंगल में पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं , यहां आने वाले प्रेमी जोड़ों पर रहती है शातिरों की नजर
विनोद राणा
पालमपुुर (कांगड़ा)। अब तक सरकार भले ही शक्ति एप या गुड़िया हेल्पलाइन की बात कर महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों की रोकने की बात कर रही है, लेकिन धरातल में हकीकत यह है कि सही में महिलाओं को न तो गुड़िया हेल्पलाइन का पता है और न ही शक्ति एप की जानकारी। सरकार ने महिलाओं से होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए ये दोनों एप लांच किए हैं। लेकिन,
जमीनी स्तर पर इनके प्रति सरकारी अमला जागरूक नहीं कर पाया है। जबकि उपमंडल पालमपुर के जिस जंगल में एक नाबालिग छात्रा से सामूहिक दुराचार हुआ है। इस जंगल में पहले भी घटनाएं हुई हैं। इससे कई लोग इस जंगल में आने से भी डरते रहे हैं। हालांकि इन वारदातों को किसने अंजाम दिया है, इसका खुलासा पुलिस जांच में हो सकता है। सूत्रों की मानें तो कुछ लोगों की इस जंगल में आने वाले प्रेमी जोड़ों पर नजर रहती है। लिहाजा, पहले भी इस जंगल में ऐसी
विज्ञापन

वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है। जंगल में नाबालिग लड़की से हुए दुराचार से यह बात फिर से सामने आई है कि यह जंगल प्रेमी जोड़ों या अन्य दोस्तों के साथ जा रहे लोगों के लिए महफूज नहीं है। बहरहाल, दुराचार के इस आए मामले में कुछ सामने आ सकता है।
विज्ञापन

बाक्स
अभिभावकों को बता कर जाएं बच्चे घूमने: एसपी
एसपी संतोष पटियाल ने कहा कि बच्चे जब भी घर से बाहर घूमने जाएं तो अपने अभिभावकों को बता कर जाएं, जबकि वे किसी सुनसान जगह पर न जाएं। यही नहीं अभिभावकों को भी पता होना चाहिए कि उनके बच्चे कहां और किसके साथ जा रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें